चारधाम यात्रा शुरू होते ही ट्रैवल माफिया सक्रिय, अन्य राज्यों के वाहन किए अनुबंधित

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हरिद्वार। उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू होते ही ट्रैवल माफियाओं ने भी अपनी बिसात बिछा दी है। ट्रैवल माफियाओं ने हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के हजारों वाहनों को अनुबंधित कर हरिद्वार कूच करने के लिए तैयार कर लिया है।डेढ़ से ढाई हजार रुपए प्रतिदिन की दर से अनुबंधित इन वाहनों को पांच से दस हजार की दर पर श्रद्धालुओं को चारधाम यात्रा पर भेजा जायेगा। हालांकि परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि प्राइवेट वाहनों में य़ात्रियों को चारधाम पर जाने की रोकथाम के लिए प्रवर्तन की टीम पूरी तरह से अलर्ट है। ऐसे सभी वाहनों को सीज कर चालान किया जायेगा। हरिद्वार एआरटीओ कार्यालय में करीब 1132 वाहनों के ग्रीन कार्ड जारी किए गए है। चारधामों में यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ धाम और बदरीनाथ धाम विश्व प्रसिद्ध है। यमुनोत्री और गंगोत्री धामों के कपाट 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ विधिवत पूजा अर्चना के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। जबकि 25 अप्रैल को केदारनाथ धाम और 27 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट पूजा अर्चना के साथ खोले जायेंगे। चारों धामों के दर्शन करने के लिए आस्थावान श्रद्धालु हरिद्वार और ऋषिकेश से वाहन लेतै हैं। क्योंकि आने वाले दिनों में वाहनों की भारी डिमांड होगी। इसके लिए हरिद्वार, ऋषिकेश के टूर ट्रैवल कारोबारियों के बुलावे पर दिल्ली, हरियाणा और पंजाब के ट्रैवल माफियाओं ने अपने निजी और कमर्शियल वाहनों के साथ हरिद्वार में डेरा डाल लिया है। अब इन प्राइवेट वाहनों को यात्रा के लिए रवाना करने की तैयारी शुरू हो गई है।
उत्तरी हरिद्वार और बैरागी कैंप और खाली पड़े प्लाटों में दिल्ली, हरियाणा और पंजाब नंबर के वाहनों को खड़े देखा जा सकता है। आने वाले दिनों में इन वाहनों की संख्या में और इजाफा होगा। बाहरी राज्यों के वाहन उत्तराखंड के वाहनों से कुछ कम कीमत पर यात्रियों को चारधाम लेकर जाते है। जबकि इन वाहनों के चालकों को उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में वाहन चलाने का अनुभव नही होता। साथ में देवभूमि उत्तराखंड के धार्मिक महत्व के ज्ञान से भी ये अनभिज्ञ होते है। जबकि हिल ड्राइविंग का अनुभव न होने से आस्थावान श्रद्धालुओं की जान भी खतरे में बनी रहती है। हालांकि दावा किया गया है कि
ऐसे तमाम वाहनों की रोकथाम के लिए एआरटीओ कार्यालय ने पूरी तैयारी कर ली है। परिवहन विभाग के सचल दस्ते को इसके लिए सक्रिय कर दिया गया है। हालांकि अभी तक बाहरी राज्यों के 32 वाहनों के ही ग्रीन कार्ड बने है। लेकिन जैसे ही यात्रा शुरू होगी तो पर्यटन माफियाओं का खेल भी शुरू हो जायेगा। आमतौर पर ऐसे वाहन तड़के ही हरिद्वार ऋषिकेश की सीमा से बाहर निकल जाते हैं। इसके लिए बाकायदा यात्रियों को भी रास्तों में मिलने वाले चैकिंग दस्तों को क्या जवाब देना है, इसके लिए प्रशिक्षित किया जाता है।अब देखना होगा कि ट्रैफिक महकमा कैसे इस सब पर नियंत्रण लगा पाता है।

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