जलसंस्थान के ईई सुर्खियों में, बिना दस्तावेज के ही चहेते ठेकेदार को दे दिया 70 लाख का टेंडर

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बाहरी प्रदेशों से मंगाएं गए वाहनों के नंबर हैं शामिल, वाहनों के दस्तावेज नहीं हैं पूरे


-विभाग के पास उपलब्ध नहीं है अनुबंध की कॉपी, पहले दिन नहीं भरी गई वाहनों की लॉग बुक

-कांवड़ मेले में सीवरेज योजना के अंतर्गत 46 वाहनों का हुआ था टेंडर

-पहले दिन मात्र 30 वाहनों की विभाग ने दिखाई मौजूदगी

हरिद्वार। कांवड़ मेला 2023 का विधिवत रूप से मंगलवार को शुरू हो चुका है। बुधवार को कांवड़ मेले का दूसरा दिन है। जिलाधिकारी धीराज सिंह गर्ब्याल ने विभागीय अधिकारियों को कांवड़ मेले से पहले सभी तैयारियां पूर्ण करने के निर्देश जारी किए थे, लेकिन उत्तराखंड जलसंस्थान अनुरक्षण शाखा (गंगा) की ओर से तैयारियां पूर्ण नहीं की गई। सीवरेज सफाई को लेकर किए गए टेंडर में आधा अधूरे दस्तावेज होने के बाद भी 70 लाख का टेंडर कर दिया गया, जो कि साफतौर पर विभागीय लापरवाही को दर्शा रहा है। कांवड़ मेले की व्यस्तता के चलते प्रशासन भी जलसंस्थान की लीपापोती पर गंभीरता नहीं दिखा पा रहा है।
कांवड़ मेले में आने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए उत्तराखंड जलसंस्थान अनुरक्षण शाखा (गंगा) की ओर से हरिद्वार सीवरेज योजना के अंतर्गत 22 जून को टेंडर खोला गया था। जिसके बाद यह टेंडर 28 जून को अधिशासी अभियंता की ओर से चहेते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए दे दिया गया, लेकिन विभाग के पास कांवड़ मेले के पहले दिन तक न तो 46 वाहनों की सूची और न ही वाहनों के दस्तावेज चेक किए गए थे। विभाग की ओर से चहेते ठेकेदार को लाभ पहुंचाने के लिए आधी-अधूरी तैयारियों के साथ किए गए टेंडर दूसरे दिन तक भी विभाग वाहनों के दस्तावेज चेक नहीं कर पाए थे। जबकि टेंडर मिलने वाले ठेकेदार को कुछ ही समय में वाहनों के दस्तावेज, नंबर, चालकों के डीएल उपलब्ध कराने होते हैं, कांवड़ मेले का दूसरा दिन समाप्त होने को है, लेकिन अभी तक विभाग वाहनों के दस्तावेज तक चेक नहीं कर पाया है। विभाग की ओर से प्राप्त सूची के मुताबिक कई वाहन ऐसे हैं, जिनका इंश्योरेंस तक नहीं है और न ही चालकों के पास हेवी ड्राइविंग लाइसेंस हैं। कई वाहनों के नंबर तक गलत दर्शाएं गए हैं। जिससे विभाग की टेंडर में की गई लीतापोती साफतौर पर दिखाई दे रही है।
उत्तराखंड जलसंस्थान अनुरक्षण शाखा (गंगा) अधिशासी अभियंता राकेश कुमार ने बताया कि अनुबंध की कॉपी कार्यालय में मौजूद नहीं है। सीवरेज सफाई के लिए जिन वाहनों को ठेके पर लिया गया है, उन वाहनों के लिए इंश्योरेंस की आवश्यकता नहीं है। इन वाहनों को चलाने वाले चालकों को हेवी ड्राइविंग लाइसेंस की आवश्यकता नहीं है। कहा कि मेले के पहले दिन चले वाहनों की लॉग बुक अभी भरी नहीं गई। कहा कि मेले के दौरान इन वाहनों का निरीक्षण करने के लिए लगाए गए सुपरवाइजरों का कोई पदनाम नहीं है। उन्होंने बताया कि कांवड़ मेले के पहले दिन 30 वाहनों को लगाया गया था।
उधर, ठेकेदार राजेश कुमार ने बताया कि जलसंस्थान के अधिशासी अभियंता की ओर से लाखों रूपये की बंदरबांट करने के लिए चहेते ठेकेदार को टेंडर दिया गया है। टेंडर में ठेकेदार की ओर से उपलब्ध कराए गए वाहन बाहरी प्रदेशों के हैं, जिनके पास दस्तावेज तक पूरे नहीं हैं। यह वाहन हरिद्वार के अलावा यूपी, हरियाणा, वेस्ट बंगाल, उड़ीसा, बिहार, आंध्र प्रदेश से मंगाएं गए है। इनमें से कई वाहनों के नंबर तक सही नहीं दर्शायें गए हैं। विभाग की ओर से इस 70 लाख की टेंडर में पूरी तरह से लीपापोती की गई है। कहा कि जिलाधिकारी हरिद्वार और उत्तराखंड जलसंस्थान के सीजीएम और जीएम को पत्र भेज कर टेंडर प्रक्रिया में बरती गई अनियमितताओं की जांच किए जाने की मांग की गई है।

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