आरोप: फाइनल रिपोर्ट लगानी है तो देनी होगी रिश्वत, दो दरोगाओं के खिलाफ मामला दर्ज

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–3.50 लाख रुपये लेने और पांच लाख रुपये मांगने का आरोप, शिकायतकर्ता ने सौंपी ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, एसपी देहात की जांच के बाद हुई कार्रवाई

खबर डोज, रुड़की। गंगनहर कोतवाली में दर्ज आत्महत्या के लिए उकसाने के एक मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर रिश्वत लेने और मांगने के गंभीर आरोप सामने आए हैं। मामले में दो तत्कालीन उपनिरीक्षकों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। शिकायतकर्ता की ओर से अधिकारियों को कथित रिश्वतखोरी से संबंधित ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग भी सौंपी गई थी। एसपी देहात की जांच के बाद दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ यह कार्रवाई की गई है।

फाइनल रिपोर्ट के नाम पर 3.50 लाख रुपये लेने का आरोप

आरोप है कि मामले की पहली विवेचना कर रहे तत्कालीन दरोगा मनदीप सिंह ने फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर शिकायतकर्ता से 3.50 लाख रुपये लिए थे। इसके बाद जब मामले की दोबारा विवेचना शुरू हुई और इसकी जिम्मेदारी तत्कालीन दरोगा बलवंत पवार को सौंपी गई, तो उन्होंने कथित तौर पर फाइनल रिपोर्ट लगाने के लिए पांच लाख रुपये की मांग की।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि रकम नहीं देने पर उसे गोली मारने, जेल भेजने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकियां भी दी गईं। मामले की गंभीरता को देखते हुए शिकायतकर्ता ने अधिकारियों के समक्ष अपनी शिकायत के साथ ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग भी प्रस्तुत की।

2023 में दर्ज मुकदमे से जुड़ा है मामला

पूरा मामला पांच जुलाई 2023 को सुषमा सैनी की ओर से निश्चय राणा और नितीश राणा, निवासी निरपुड़ा, जिला बागपत के खिलाफ दर्ज कराए गए आत्महत्या के लिए उकसाने के मुकदमे से संबंधित है। इस मामले की प्रारंभिक विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक मनदीप सिंह ने की थी। बाद में मामले की दोबारा विवेचना तत्कालीन उपनिरीक्षक बलवंत पवार को सौंपी गई।

इसी दौरान फाइनल रिपोर्ट लगाने के नाम पर कथित रूप से रिश्वत लेने और मांगने के आरोप सामने आए। शिकायत मिलने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) ने मामले की जांच एसपी देहात को सौंपी थी।

जांच के बाद दर्ज हुआ मुकदमा

एसपी देहात की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर दोनों तत्कालीन उपनिरीक्षकों के खिलाफ गंगनहर कोतवाली में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।

इस प्रकरण ने पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली और विवेचना के दौरान पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, दोनों तत्कालीन दरोगाओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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