उत्तराखंड में चुनावी माहौल गरम, पीएम रैली की चर्चा के बीच कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक पर लगे गुटबाजी के आरोप

खबर डोज, हरिद्वार। उत्तराखंड में आगामी चुनावों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी पूरे दमखम के साथ चुनावी मोड में नजर आ रही है और प्रधानमंत्री की संभावित रैली को लेकर चर्चाएं जोरों पर हैं, वहीं हरिद्वार जिले से पार्टी की अंदरूनी खींचतान की खबरें सामने आ रही हैं। इस बीच कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक एक बार फिर गुटबाजी के आरोपों को लेकर सुर्खियों में हैं।
हाल ही में ज्वालापुर विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक स्वागत कार्यक्रम ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है। कार्यक्रम उसी मंडल में आयोजित हुआ, लेकिन मंडल अध्यक्ष प्रताप प्रधान को न तो आमंत्रित किया गया और न ही कार्यक्रम से जुड़े पोस्टरों में उनका नाम या तस्वीर शामिल की गई। इस घटनाक्रम के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच कई तरह के सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि यह केवल एक साधारण चूक नहीं, बल्कि “चयनात्मक राजनीति” का हिस्सा हो सकता है। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब संगठन के प्रमुख पदों पर बैठे लोगों को ही नजरअंदाज किया जाएगा, तो जमीनी स्तर पर एकजुटता कैसे कायम रह पाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार ऐसे प्रसंग सामने आ चुके हैं, जहां संगठन के भीतर तालमेल की कमी साफ नजर आई। इससे यह संकेत मिलते हैं कि हरिद्वार में पार्टी के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं चल रहा है।
एक तरफ पार्टी का शीर्ष नेतृत्व बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की रणनीति पर जोर दे रहा है, वहीं दूसरी ओर स्थानीय स्तर पर जारी खींचतान इन प्रयासों को कमजोर करती दिख रही है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि समय रहते इन अंदरूनी मतभेदों को दूर नहीं किया गया, तो इसका असर चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पार्टी नेतृत्व इस बढ़ते असंतोष और गुटबाजी पर किस तरह काबू पाता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या संगठनात्मक एकता कायम रखी जा सकेगी या फिर यह अंदरूनी सियासत चुनाव से पहले बड़ा मुद्दा बन जाएगी।

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