ग्रीन सेस के ट्रायल में ही होने लगा विरोध, लोकल लोगों के बाहरी राज्य के नंबरों के वाहनों के FASTag से भी कटने लगा ग्रीन सेस

—बाहरी राज्यों के वाहनों पर 80 रुपये ग्रीन सेस, दोपहिया वाहनों को छूट
—कोटद्वार कौड़िया चेक पोस्ट सहित बॉर्डर चेक पोस्टों पर लगे कैमरे
खबर डोज, कोटद्वार। बाहरी राज्यों से उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले वाहनों से ग्रीन सेस वसूलने की सरकारी योजना का ट्रायल शुरू होते ही विरोध के स्वर उठने लगे हैं। सरकार ने ग्रीन सेस की वसूली को पूरी तरह डिजिटल करते हुए FASTag सिस्टम लागू कर दिया है, जिसके तहत बॉर्डर चेक पोस्टों पर लगे कैमरों के माध्यम से सीधे वाहनों के FASTag खातों से राशि कट रही है।
लोकल लोगों में बढ़ी चिंता
ट्रायल के दौरान ही कई स्थानों पर स्थानीय लोगों की परेशानी सामने आने लगी है। दरअसल, ऐसे कई लोग हैं जो उत्तराखंड में रहते हैं, लेकिन उनके वाहन बाहरी राज्यों के पंजीकरण नंबर के हैं। इन वाहनों से भी FASTag के जरिए ग्रीन सेस कटने लगा है, जिससे स्थानीय नागरिकों में असमंजस और नाराजगी देखी जा रही है।
इतना कटेगा ग्रीन सेस
सरकारी व्यवस्था के अनुसार, बाहरी राज्यों से आने वाले चारपहिया और अन्य वाहनों से प्रत्येक प्रवेश पर 80 रुपये ग्रीन सेस वसूला जा रहा है। हालांकि, दोपहिया वाहनों को इस सेस से छूट दी गई है। ट्रायल के दौरान यह राशि हर बार राज्य की सीमा पार करने पर FASTag से अपने आप कट रही है।
यहां लगाए गए हैं कैमरे
कोटद्वार में आरटीओ चौराहे पर यह सिस्टम सक्रिय कर दिया गया है। इसके अलावा राज्य के अन्य जिलों में भी बॉर्डर चेक पोस्टों पर हाई-रिजॉल्यूशन कैमरे और FASTag रीडर लगाए गए हैं, जो वाहन नंबर और FASTag को स्कैन कर स्वतः ग्रीन सेस वसूल रहे हैं।
लोगों की मांग
स्थानीय लोगों का कहना है कि ट्रायल के दौरान ही स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाने चाहिए, ताकि उत्तराखंड में रहने वाले, लेकिन बाहरी राज्यों के नंबर वाले वाहनों को अनावश्यक रूप से ग्रीन सेस न देना पड़े। वहीं, कुछ लोगों ने यह भी सवाल उठाया है कि यदि कोई वाहन एक ही दिन में कई बार बॉर्डर पार करता है, तो क्या हर बार सेस कटेगा।
ग्रीन सेस की यह नई व्यवस्था पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से लाई गई है, लेकिन ट्रायल फेज में ही सामने आ रही समस्याओं के चलते सरकार और परिवहन विभाग के सामने इसे लेकर नियमों को और स्पष्ट करने की चुनौती खड़ी हो गई है।
आपको बताते चले कि उत्तराखंड शासन के परिवहन अनुभाग-1 ने ग्रीन सेस को लेकर संशोधित अधिसूचना जारी कर दी है। 27 मई 2025 को जारी आदेश में 9 फरवरी 2024 की पूर्व अधिसूचना में संशोधन करते हुए मोटर वाहनों पर देय ग्रीन सेस की नई दरें निर्धारित की गई हैं। यह आदेश उत्तराखंड मोटरयान कराधान सुधार अधिनियम, 2003 की धारा 4(5) के तहत जारी किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत निजी वाहनों के पंजीकरण के समय मोटरसाइकिल पर 500 रुपये, पेट्रोल चालित कार या हल्के वाहन पर 1500 रुपये और डीजल चालित वाहन पर 3000 रुपये ग्रीन सेस देना होगा। वहीं, 15 वर्ष की आयु पूरी कर चुके वाहनों के नवीनीकरण के समय मोटरसाइकिल पर 1000 रुपये प्रति पांच वर्ष, पेट्रोल वाहन पर 3000 रुपये प्रति पांच वर्ष और डीजल वाहन पर 5000 रुपये प्रति पांच वर्ष ग्रीन सेस निर्धारित किया गया है।
परिवहन वाहनों के फिटनेस प्रमाणपत्र के नवीनीकरण के दौरान भी आयु के आधार पर पेट्रोल और डीजल वाहनों पर अलग-अलग दरें तय की गई हैं। पांच वर्ष तक के वाहनों पर पेट्रोल के लिए 400 और डीजल के लिए 500 रुपये, पांच से दस वर्ष तक पेट्रोल 600 और डीजल 750 रुपये, दस से पंद्रह वर्ष तक पेट्रोल 800 और डीजल 1000 रुपये तथा पंद्रह वर्ष से अधिक पुराने वाहनों पर पेट्रोल 1000 और डीजल 1250 रुपये ग्रीन सेस देना होगा।
अन्य राज्यों से उत्तराखंड में प्रवेश करने वाले वाहनों पर भी प्रत्येक प्रवेश पर ग्रीन सेस वसूला जाएगा। तीन एक्सल बस पर 450 रुपये, चार से छह एक्सल बस पर 600 रुपये और सात एक्सल या उससे अधिक पर 700 रुपये देय होंगे। मध्यम और भारी माल वाहनों (7.5 से 18.5 टन) पर 250 रुपये, हल्के माल वाहन (2 टन से अधिक और 7.5 टन से कम) पर 120 रुपये, दो टन तक के मिनी या डिलीवरी वाहन पर 80 रुपये, भारी निर्माण उपकरण वाहनों पर 250 रुपये, 12 फीट से अधिक क्रेन पर 140 रुपये तथा मोटर कैब, मैक्सी कैब और ओम्नी बस पर 80 रुपये ग्रीन सेस निर्धारित किया गया है।
हालांकि, अन्य राज्यों के दोपहिया वाहन, केंद्र व राज्य सरकार के वाहन, कृषि ट्रैक्टर-ट्रेलर, रोड रोलर, कंबाइन हार्वेस्टर, शव वाहन, एम्बुलेंस, फायर टेंडर, सेना के वाहन और इलेक्ट्रिक, सोलर, हाइब्रिड तथा सीएनजी चालित वाहनों को ग्रीन सेस से छूट दी गई है।
सरकार ने बार-बार प्रवेश करने वाले बाहरी वाहनों के लिए त्रैमासिक और वार्षिक विकल्प भी दिया है। निर्धारित दर का 20 गुना भुगतान कर तीन माह और 60 गुना भुगतान कर एक वर्ष के लिए राज्य में प्रवेश की अनुमति ली जा सकती है। शासन का कहना है कि ग्रीन सेस से प्राप्त राशि पर्यावरण संरक्षण और हरित परियोजनाओं पर खर्च की जाएगी। आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है।

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