कुंभ 2027 की तैयारियों पर सवाल: ज्वालापुर से पतंजलि तक हाईवे पर अंधेरा, क्या रोशनी के बिना होगा कुंभ?, इन कार्यों का सीएम साहब ने किया था शिलान्यास, देखिए वीडियो

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खबर डोज, हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेला 2027 की तैयारियां जहां एक ओर तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही हैं, वहीं दूसरी ओर ज्वालापुर से पतंजलि तक राष्ट्रीय राजमार्ग पर फैला अंधेरा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। रात होते ही हाईवे के कई हिस्सों में स्ट्रीट लाइटें बंद पड़ी रहती हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है।

स्थानीय लोगों और यात्रियों का कहना है कि ज्वालापुर से पतंजलि योगपीठ तक का यह मार्ग कुंभ के दौरान मुख्य आवागमन मार्गों में शामिल रहेगा। ऐसे में यदि अभी से लाइट व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो कुंभ के समय लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर संकट खड़ा हो सकता है। अंधेरे के कारण आए दिन छोटे-बड़े हादसे होने की आशंका बनी रहती है।
हाल ही में प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार में कुंभ 2027 की तैयारियों को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की थी। बैठक में विभिन्न विभागों के करोड़ों रुपये के प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई, लेकिन आश्चर्यजनक रूप से मेला प्रशासन की ओर से हाईवे की बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों के संबंध में कोई ठोस प्रस्ताव सामने नहीं रखा गया।
कुंभ जैसे विश्वस्तरीय आयोजन में जहां देश-विदेश से करोड़ों श्रद्धालु पहुंचते हैं, वहां मूलभूत सुविधाओं की अनदेखी समझ से परे है। ज्वालापुर से पतंजलि तक का मार्ग न केवल शहर की लाइफलाइन है, बल्कि आपातकालीन सेवाओं के लिए भी महत्वपूर्ण कड़ी है। ऐसे में प्रकाश व्यवस्था का दुरुस्त होना अनिवार्य है।
स्थानीय व्यापारियों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि कुंभ 2027 से पूर्व हाईवे की सभी स्ट्रीट लाइटों का सर्वे कराकर तत्काल मरम्मत और नई लाइटें लगाने की कार्ययोजना तैयार की जाए। उनका कहना है कि यदि अभी से व्यवस्थाएं नहीं सुधारी गईं तो कुंभ के दौरान अव्यवस्था और दुर्घटनाएं प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकती हैं।
अब देखना यह होगा कि मेला प्रशासन और संबंधित विभाग इस गंभीर समस्या पर कब संज्ञान लेते हैं और कब तक ज्वालापुर से पतंजलि तक का हाईवे रोशनी से जगमगाता नजर आएगा।

शिलान्यास किए गए कार्यों का विवरण

1.घाट निर्माण एवं सिंचाई अवसंरचना (सिंचाई विभाग) कुल 07 कार्य — लागत: रु. 70.54 करोड़, अपर गंगा नहर के दाएं एवं बाएं तट पर विभिन्न स्थानों पर घाटों का निर्माण एवं पुनर्विकास। 90 मीटर स्पान का कम्पोजिट स्टील गर्डर द्वि-लेन सेतु निर्माण। 3 अस्थायी पुलों की स्थापना,मरम्मत एवं रख-रखाव।

2.सड़क एवं परिवहन अवसंरचना (लोक निर्माण विभाग) कुल 12 कार्य — लागत: 127.23 करोड़,बहादराबाद–सिडकुल चार लेन मार्ग का चौड़ीकरण एवं सुदृढ़ीकरण। राष्ट्रीय राजमार्ग-334 (दिल्ली–हरिद्वार–देहरादून) का चौड़ीकरण। नगर क्षेत्र में बीसी (बिटुमिनस कंक्रीट) द्वारा नवीनीकरण, फुटपाथ निर्माण एवं सौंदर्यीकरण। प्रशासनिक रोड कॉरिडोर का विकास।

3.पेयजल एवं जल आपूर्ति अवसंरचना (जल संस्थान) कुल 09 कार्य — लागत: 18.11 करोड़, पंपिंग जलापूर्ति योजनाओं का पुनर्गठन। 1500 केएल क्षमता का ओवरहेड टैंक एवं ट्यूबवेल निर्माण। 10 मीटर व्यास के 05 आरसीसी इन्फिल्ट्रेशन कुओं का निर्माण।

4.श्रद्धालु सुविधाएँ एवं सहायक अवसंरचना कुल 06 कार्य — लागत: 18.67 करोड़, चंडी देवी एवं मनसा देवी मंदिर मार्ग पर तीर्थयात्रियों हेतु सुविधाओं का विकास। बैरक एवं औषधि भंडारण कक्ष का निर्माण। मेला नियंत्रण भवन का नवीनीकरण एवं अतिरिक्त बैरकों का निर्माण।

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