देहरादून में पुलिस के इकबाल पर उठे सवाल, वन विभाग के SDO पर सरेराह हमला, भीड़ ने दौड़ा-दौड़ा कर पीटा, वीडियो वायरल

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विकासनगर के बाढ़वाला में नेशनल हाईवे पर बवाल, अवैध खनन रोकने को लेकर विवाद, पुलिस ने दर्ज किया क्रॉस मुकदमा


खबर डोज, देहरादून। देहरादून में सरकारी अधिकारियों पर हमलों की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी पर हमले की घटना के बाद अब विकासनगर क्षेत्र के बाढ़वाला में वन विभाग के एक एसडीओ के साथ सरेराह मारपीट का सनसनीखेज मामला सामने आया है। बीच सड़क पर हुई इस हिंसक झड़प का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसने कानून व्यवस्था और पुलिस के इकबाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

घटना दिल्ली-यमुनोत्री नेशनल हाईवे पर हुई, जहां भूमि संरक्षण वन प्रभाग कालसी के एसडीओ राजीव नयन नौटियाल के साथ खनन कार्य से जुड़े लोगों की तीखी कहासुनी हो गई। देखते ही देखते विवाद ने हिंसक रूप ले लिया और भीड़ ने सरकारी अधिकारी को दौड़ा-दौड़ा कर पीटना शुरू कर दिया। वायरल वीडियो में साफ दिख रहा है कि अधिकारी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे हैं, जबकि कुछ लोग उन्हें लात-घूंसों से मारते नजर आ रहे हैं।

अवैध खनन रोकने को लेकर हुआ विवाद
एसडीओ का आरोप है कि वे आरक्षित वन क्षेत्र में अवैध खनन की सूचना पर मौके पर पहुंचे थे। जब उन्होंने खनन गतिविधियों का वीडियो बनाना शुरू किया तो वहां मौजूद लोगों ने उनके साथ अभद्रता की और मोबाइल फोन छीनकर तोड़ दिया। विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की गई।
वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि अधिकारी ने पहले अभद्र व्यवहार किया, जिसके बाद विवाद बढ़ गया। हालांकि, वीडियो में जिस तरह से भीड़ एक अधिकारी पर टूट पड़ती दिख रही है, उसने पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

आधे घंटे तक हाईवे पर हंगामा, लगा लंबा जाम
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, करीब आधे घंटे तक दिल्ली-यमुनोत्री हाईवे पर अफरा-तफरी का माहौल रहा। मारपीट और हंगामे के कारण सड़क पर लंबा जाम लग गया। राहगीर दहशत में नजर आए। सवाल यह भी उठ रहा है कि इतने व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर इस तरह की घटना के दौरान पुलिस की तत्काल मौजूदगी क्यों नहीं दिखी।

पुलिस ने दर्ज किया क्रॉस मुकदमा
घटना के बाद दोनों पक्ष विकासनगर कोतवाली पहुंचे, जहां पुलिस ने दोनों की तहरीर के आधार पर क्रॉस एफआईआर दर्ज कर ली है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और वीडियो फुटेज के आधार पर दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जाएगी।

कानून व्यवस्था पर उठे सवाल
दिन-दहाड़े एक सरकारी अधिकारी पर हमला और उसका मोबाइल तोड़ देना यह दर्शाता है कि कुछ असामाजिक तत्वों के मन से कानून का डर खत्म होता जा रहा है। क्या सड़क पर भीड़ द्वारा ‘ऑन-द-स्पॉट इंसाफ’ की इजाजत दी जा सकती है? क्या सरकारी अधिकारी अब अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते समय भी सुरक्षित नहीं हैं?
देहरादून और विकासनगर क्षेत्र में लगातार बढ़ रही ऐसी घटनाओं ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब सबकी निगाहें पुलिस जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।

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