लाखों में है 30 मोबाइलों की कीमत: सीआईयू कोटद्वार ने होली पर खोए मोबाइल देकर लौटाई मायूस चेहरों पर मुस्कान, ऐसे करें शिकायत, देखिए वीडियो

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खबर डोज, कोटद्वार। होली के पावन अवसर पर सीआईयू कोटद्वार की टीम ने सराहनीय कार्य करते हुए करीब 30 गुमशुदा मोबाइल फोन बरामद कर उनके असली मालिकों को सौंप दिए। बरामद मोबाइलों की कुल कीमत 8 लाख रुपये बताई जा रही है। अपने खोए मोबाइल वापस पाकर लोगों के चेहरों पर खुशी साफ झलक रही थी।

कोतवाली कोटद्वार में पत्रकारों से रूबरू होते अपर पुलिस अधीक्षक मनोज ठाकुर ने बताया कि पुलिस टीम ने तकनीकी सर्विलांस और ट्रैकिंग के माध्यम से अलग-अलग स्थानों से मोबाइल फोन बरामद किए हैं। ये मोबाइल पिछले कुछ महीनों में गुम या चोरी हुए थे, जिनकी शिकायत संबंधित थानों में दर्ज कराई गई थी।

लगातार प्रयासों और तकनीकी विश्लेषण के बाद टीम ने सफलता हासिल की। उन्होंने कहा कि होली से ठीक पहले मोबाइल वापसी की यह कार्रवाई लोगों के लिए किसी उपहार से कम नहीं रही। कई लोगों ने बताया कि मोबाइल में जरूरी डाटा, दस्तावेज और व्यक्तिगत यादें सुरक्षित थीं, जिन्हें वापस पाकर उन्हें बड़ी राहत मिली है।
मोबाइल प्राप्त करने वालों ने पुलिस टीम का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई से आमजन का पुलिस पर विश्वास और मजबूत होता है। पत्रकार वार्ता में सीओ कोटद्वार निहारिका सेमवाल, कोतवाली प्रभारी निरीक्षक प्रदीप नेगी, सीआईयू कोटद्वार प्रभारी रणजीत तोमर शामिल रहे।

ऐसे दर्ज करें CIER पोर्टल पर मोबाइल गुम होने की शिकायत

सीआईयू कोटद्वार प्रभारी उपनिरीक्षक रणजीत तोमर ने बताया कि CEIR पोर्टल भारत सरकार के दूरसंचार विभाग की ओर से संचालित एक ऑनलाइन प्रणाली है, जिसके माध्यम से खोए या चोरी हुए मोबाइल फोन को ब्लॉक कराया जा सकता है। इसका उद्देश्य गुम या चोरी हुए मोबाइल के दुरुपयोग को रोकना और उसे ट्रेस करने में सहायता प्रदान करना है।
मोबाइल गुम या चोरी होने पर सबसे पहले संबंधित थाने में एफआईआर या गुमशुदगी दर्ज करानी चाहिए। इसके बाद मोबाइल का IMEI नंबर, पुलिस शिकायत संख्या, मोबाइल नंबर और पहचान पत्र की जानकारी के साथ सीईआईआर पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन किया जाता है। ओटीपी सत्यापन के बाद आवेदन सबमिट किया जाता है।
शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित मोबाइल का IMEI नंबर पूरे देश में ब्लॉक कर दिया जाता है, जिससे कोई भी व्यक्ति उस फोन में नया सिम इस्तेमाल नहीं कर सकता। यदि बाद में मोबाइल मिल जाता है तो उसी पोर्टल के माध्यम से उसे अनब्लॉक भी कराया जा सकता है।
होली के रंगों के बीच पुलिस की इस पहल ने कई परिवारों की खुशियों को दोगुना कर दिया है और साथ ही यह संदेश भी दिया है कि सतर्कता और तकनीकी सहयोग से अपराध पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

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