वाह: कुंभ मेला 2027 का बजट है टाइट, सभागार में बिना मीटिंग के भी चलते हैं पंखे और लाइट, वीडियो वायरल

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बिना मीटिंग के भी सभागार में चल रहे पंखे और बिजली, जिम्मेदार बेखबर

एक ओर बजट की कमी का रोना, दूसरी ओर संसाधनों की खुली बर्बादी

मेला प्रशासन की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल

खबर डोज, हरिद्वार। कुंभ मेला 2027 को लेकर जहां एक ओर प्रशासन सीमित बजट का हवाला देते हुए व्यवस्थाओं को संतुलित करने की बात कर रहा है, वहीं दूसरी ओर उसी बजट के दुरुपयोग के मामले भी सामने आने लगे हैं। ताजा मामला मेला सभागार से जुड़ा है, जहां बिना किसी मीटिंग के भी दिन में बिजली और पंखे चलते रहने से संसाधनों की बर्बादी साफ नजर आ रही है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, मेला सभागार में इन दिनों अक्सर ऐसी स्थिति देखी जा रही है जब वहां कोई बैठक निर्धारित नहीं होती, इसके बावजूद सभागार की लाइटें और पंखे लगातार चलते रहते हैं। यह स्थिति न केवल हैरान करने वाली है, बल्कि उस समय और भी गंभीर हो जाती है जब मेला प्रशासन खुद बजट की कमी का हवाला देकर कई जरूरी कार्यों को सीमित करने की बात करता है।

आज भी सभागार में लाइट और पंखे चल रहे थे, इस दौरान मेलाधिकारी और अपर मेला अधिकारी अपने-अपने कार्यालयों में मौजूद थे और सभागार में किसी प्रकार की बैठक या गतिविधि नहीं चल रही थी। इसके बावजूद बिजली उपकरणों का यूं बेवजह चलना प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक यह स्थिति नई नहीं है, बल्कि पिछले कुछ समय से लगातार देखने को मिल रही है। नतीजन, बिजली की अनावश्यक खपत लगातार बढ़ रही है, जो सीधे तौर पर सरकारी खजाने पर अतिरिक्त बोझ डाल रही है।

कुंभ मेला जैसे विशाल आयोजन के लिए जहां हर छोटे-बड़े खर्च का हिसाब रखा जाना जरूरी होता है, वहां इस प्रकार की लापरवाही प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। एक ओर सरकार और प्रशासन ‘स्मार्ट मैनेजमेंट’ और ‘संसाधनों के बेहतर उपयोग’ की बात करते हैं, वहीं दूसरी ओर इस तरह की घटनाएं उन दावों की पोल खोलती नजर आती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस प्रकार की अनावश्यक खर्चों पर रोक नहीं लगाई गई, तो इसका असर बड़े स्तर पर देखने को मिल सकता है। ऐसे में छोटी-छोटी लापरवाहियां मिलकर बड़ी आर्थिक क्षति का कारण बन सकती हैं। यह सवाल भी उठता है कि जब उच्च अधिकारी स्वयं कार्यालय में मौजूद होते हैं, तब भी ऐसी स्थिति क्यों बनी रहती है।

स्थानीय नागरिकों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि अभी से इस प्रकार की अनियमितताओं पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो आगे चलकर यह समस्या और विकराल रूप ले सकती है। साथ ही उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की भी मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो।

कुंभ मेला 2027 को लेकर प्रशासन भले ही बड़े-बड़े दावे कर रहा हो, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। बजट की कमी के बावजूद संसाधनों का इस तरह दुरुपयोग होना न केवल चिंता का विषय है, बल्कि यह प्रशासनिक जवाबदेही पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

अब देखना यह होगा कि मेला प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और क्या वास्तव में इस प्रकार की लापरवाही पर कोई सख्त कदम उठाए जाते हैं या फिर यह मामला भी अन्य मामलों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।

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