महिला दिवस पर विशेष: विधि सेवा और समाज सेवा का प्रेरणादायक उदाहरण, एडवोकेट रीमा शाहीम

खबर डोज, हरिद्वार। समाज में ऐसे लोगों की संख्या बहुत कम होती है, जो अपने पेशे के साथ-साथ समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्ग के लिए भी समर्पित होकर काम करते हैं। उन्हीं में से एक नाम है एडवोकेट रीमा शाहीम का। रीमा शाहीम जिला एवं सत्र न्यायालय में एक सफल अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस करती हैं और साथ ही समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। उनका मानना है कि कानून केवल अदालतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के हर व्यक्ति के अधिकारों की रक्षा करने का माध्यम है।

एडवोकेट रीमा शाहीम पिछले कई वर्षों से जिला एवं सत्र न्यायालय में विधि व्यवसाय से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने अपने परिश्रम, ईमानदारी और लगन के दम पर वकालत के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाई है। अपने मुवक्किलों के मामलों को गंभीरता से समझना और उन्हें न्याय दिलाने के लिए पूरी मेहनत करना उनकी कार्यशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। वे मानती हैं कि हर व्यक्ति को न्याय पाने का समान अधिकार है और अधिवक्ता का कर्तव्य है कि वह अपने ज्ञान और अनुभव के माध्यम से लोगों की सहायता करे।

रीमा शाहीम केवल एक अधिवक्ता ही नहीं बल्कि एक सक्रिय समाजसेवी भी हैं। समाज में महिलाओं को न्याय दिलाने और उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के लिए वे लगातार कार्य कर रही हैं। विशेष रूप से वे जरूरतमंद और पीड़ित महिलाओं को निशुल्क विधिक सहायता प्रदान करती हैं। कई बार ऐसी महिलाएं, जो आर्थिक रूप से कमजोर होती हैं या जिन्हें कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं होती, वे अपने अधिकारों के लिए लड़ नहीं पातीं। ऐसे समय में एडवोकेट रीमा शाहीम उनके लिए सहारा बनकर सामने आती हैं और बिना किसी शुल्क के उन्हें कानूनी सलाह और सहायता देती हैं।

महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उन्हें न्याय दिलाने के उद्देश्य से वे महिला ऐच्छिक ब्यूरो की सदस्य भी हैं। इस मंच के माध्यम से वे महिलाओं से जुड़े विभिन्न मामलों में मार्गदर्शन देती हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें कानूनी प्रक्रिया के बारे में विस्तार से समझाती हैं। महिला ऐच्छिक ब्यूरो के माध्यम से कई परिवारों और महिलाओं को सही दिशा मिली है।

पति-पत्नी के बीच होने वाले विवाद आज के समय में एक गंभीर सामाजिक समस्या बनते जा रहे हैं। कई बार छोटी-छोटी गलतफहमियों के कारण परिवार टूटने की नौबत आ जाती है। ऐसे मामलों में एडवोकेट रीमा शाहीम का प्रयास रहता है कि विवाद को अदालत तक जाने से पहले ही बातचीत और समझदारी के माध्यम से सुलझा लिया जाए। वे पति-पत्नी के बीच निशुल्क समझौता कराने का कार्य भी करती हैं, जिससे कई परिवार टूटने से बच जाते हैं और आपसी संबंध फिर से सामान्य हो जाते हैं। उनके इस प्रयास की समाज में काफी सराहना होती है।
एडवोकेट रीमा शाहीम का मानना है कि समाज में जागरूकता फैलाना बहुत जरूरी है, क्योंकि कई लोग अपने अधिकारों और कानून से जुड़ी मूलभूत जानकारी से भी अनजान होते हैं। इसी उद्देश्य से वे समय-समय पर विभिन्न संस्थाओं, स्कूलों और कॉलेजों में जाकर छात्र-छात्राओं को विधिक जानकारी प्रदान करती हैं। इन कार्यक्रमों के दौरान वे विद्यार्थियों को संविधान, उनके अधिकारों, महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े कानूनों और साइबर अपराध जैसे विषयों के बारे में विस्तार से बताती हैं। इससे युवाओं में कानून के प्रति जागरूकता बढ़ती है और वे अपने अधिकारों को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं।
रीमा शाहीम की समाज सेवा और विधिक योगदान को देखते हुए कई बार उन्हें विभिन्न अधिकारियों और संस्थाओं द्वारा सम्मानित भी किया गया है। यह सम्मान उनके द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना का प्रतीक है। हालांकि वे मानती हैं कि सम्मान से अधिक महत्वपूर्ण समाज की सेवा करना और जरूरतमंद लोगों की मदद करना है। उनके अनुसार यदि उनके प्रयासों से किसी पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिलता है या किसी परिवार में फिर से खुशियां लौटती हैं, तो वही उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान है।
उनकी कार्यशैली में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का विशेष स्थान है। वे हर मामले को केवल एक कानूनी प्रक्रिया के रूप में नहीं बल्कि एक मानवीय दृष्टिकोण से भी देखती हैं। यही कारण है कि जिन लोगों ने उनसे सहायता प्राप्त की है, वे उनके प्रति गहरा विश्वास और सम्मान रखते हैं।
आज के समय में जब समाज में कई तरह की चुनौतियां और समस्याएं मौजूद हैं, ऐसे में एडवोकेट रीमा शाहीम जैसे लोग उम्मीद की एक किरण बनकर सामने आते हैं। वे न केवल कानून के माध्यम से न्याय दिलाने का प्रयास कर रही हैं, बल्कि समाज में जागरूकता और सहयोग की भावना को भी मजबूत कर रही हैं।
भविष्य में भी उनका उद्देश्य समाज के अधिक से अधिक लोगों तक विधिक सहायता पहुंचाना और विशेष रूप से महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। उनका मानना है कि जब समाज का हर व्यक्ति अपने अधिकारों और कर्तव्यों को समझेगा, तभी एक न्यायपूर्ण और सशक्त समाज का निर्माण संभव हो पाएगा।
इस प्रकार एडवोकेट रीमा शाहीम एक ऐसी शख्सियत हैं, जिन्होंने अपने पेशे को केवल आजीविका का साधन नहीं बल्कि समाज सेवा का माध्यम बनाया है। उनकी मेहनत, समर्पण और समाज के प्रति जिम्मेदारी उन्हें एक प्रेरणादायक व्यक्तित्व बनाती है। समाज को ऐसे ही लोगों की जरूरत है, जो अपने ज्ञान और क्षमता का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए करें और एक बेहतर समाज के निर्माण में योगदान दें।

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