अंकिता हत्याकांड: वीआईपी शब्द का फैलाया जा रहा भ्रम, एसआईटी ने लिया एक नाम धर्मेंद्र उर्फ प्रधान, देखिए वीडियो

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खबर डोज, देहरादून। अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि मामले में किसी भी प्रकार की वीआईपी संलिप्तता सामने नहीं आई है। जांच पूरी तरह साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर की गई है। अब तक की जांच में ऐसा कोई नाम प्रकाश में नहीं आया है, जिसे वीआईपी की श्रेणी में रखा जा सके। “वीआईपी” शब्द का इस्तेमाल कर कुछ लोग जानबूझकर भ्रम फैला रहे हैं, जो पूरी तरह निराधार है।

एसपी देहात शेखर सुयाल ने बुलडोजर कार्रवाई को लेकर लगाए जा रहे आरोपों को भी खारिज किया। उन्होंने कहा कि किसी भी कार्रवाई से पहले घटनास्थल की पूरी वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी कराई गई थी। सभी अहम साक्ष्यों को विधिवत सुरक्षित किया गया, इसलिए यह कहना कि बुलडोजर चलाने से साक्ष्य नष्ट हुए, तथ्यहीन और भ्रामक है।
उन्होंने कहा कि जांच के दौरान फॉरेंसिक साक्ष्य, मोबाइल डेटा, वीडियो फुटेज और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ा गया है। एसपी देहात ने कहा कि जांच को किसी भी दबाव या प्रभाव से मुक्त रखते हुए कानून के दायरे में रहकर आगे बढ़ाया गया।
एसपी देहात शेखर सुयाल ने यह भी कहा कि कुछ लोगों की आपसी बातचीत को संदर्भ से हटाकर पेश किया जा रहा है और उसे मामले से जोड़कर भ्रम पैदा करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां असली तथ्यों से ध्यान भटकाने का प्रयास हो सकती हैं।
उन्होंने यह भी खुलासा किया कि जांच के दौरान ऐसे संकेत सामने आए हैं, जिनसे प्रतीत होता है कि अंकिता की मौत को आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की जा रही थी। एसपी देहात के अनुसार, सुरेश राठौड़ और उर्मिला सनावर के बीच हुई कथित बातचीत में अंकिता के नहर में कूदने की बात सामने आई है, जो कई सवाल खड़े करती है और एक संभावित साजिश की ओर इशारा करती है।
एसपी देहात शेखर सुयाल ने जनता से अपील की कि वे अफवाहों और राजनीतिक बयानबाजी से दूर रहें तथा पुलिस जांच पर भरोसा बनाए रखें। उन्होंने कहा कि पुलिस पूरी निष्पक्षता और प्रतिबद्धता के साथ जांच कर रही है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

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