रुड़की के अस्पताल में मरीजों की छीना-झपटी में चले लाठी-डंडे, अस्पताल बना अखाड़ा, CCTV फुटेज वायरल

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खबर डोज, रुड़की। मरीजों के लिए ‘मसीहा’ माने जाने वाले निजी अस्पतालों के बीच मुनाफे की जंग इस कदर हिंसक हो जाएगी, इसकी शायद किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। रुड़की में दो निजी नर्सिंग होम के बीच मरीजों को लेकर ऐसा बवाल हुआ कि अस्पताल परिसर अखाड़े में तब्दील हो गया। लाठी-डंडों, लात-घूंसों और गाली-गलौज के साथ हुई मारपीट की पूरी वारदात अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है।

सीसीटीवी फुटेज में साफ देखा जा सकता है कि अस्पताल परिसर में कई लोग एक-दूसरे पर टूट पड़े हैं। कोई लात मार रहा है, कोई घूंसे बरसा रहा है तो कहीं लाठी-डंडे चल रहे हैं। यह नजारा किसी गैंगवार जैसा प्रतीत होता है, लेकिन हकीकत में यह एक अस्पताल के भीतर का दृश्य है, जहां मरीजों की सुरक्षा और इलाज की बजाय हिंसा का तांडव मचा हुआ है।


मरीजों की छीना-झपटी बनी विवाद की वजह
इस पूरे विवाद की जड़ मरीजों को लेकर चल रही होड़ बताई जा रही है। आशा नर्सिंग होम के संचालक का आरोप है कि कैलाश नर्सिंग होम के कर्मचारियों ने उनके अस्पताल से एक मरीज को जबरन उठाकर ले जाने की कोशिश की, जिसे वे ‘किडनैपिंग’ करार दे रहे हैं। संचालक के अनुसार, जब वे इस मामले की जानकारी लेने कैलाश नर्सिंग होम पहुंचे, तो वहां पहले से मौजूद लोगों ने उन पर हमला कर दिया और जमकर मारपीट की गई।


कैलाश नर्सिंग होम ने आरोपों को बताया साजिश
वहीं कैलाश नर्सिंग होम प्रबंधन का कहना है कि उन पर लगाए गए आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। उनका दावा है कि यह हमला नहीं बल्कि उनके खिलाफ रची गई साजिश है। संचालक के अनुसार, दो दर्जन से अधिक लोगों ने एक साथ अस्पताल पर धावा बोला, जमकर तोड़फोड़ की और स्टाफ के साथ मारपीट कर कई कर्मचारियों को घायल कर दिया।

पुलिस जांच में जुटी, CCTV बना अहम सबूत
घटना की जानकारी मिलते ही रुड़की पुलिस हरकत में आ गई। दोनों पक्षों की ओर से पुलिस को तहरीर दी गई है और अस्पतालों के सीसीटीवी फुटेज पुलिस के कब्जे में हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वीडियो के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है। जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

गंभीर सवाल खड़े करता मामला
इस घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां अस्पतालों को मरीजों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद स्थान होना चाहिए, वहीं यहां मरीजों को लेकर सरेआम हिंसा हो रही है। सवाल यह है कि अगर जीवन बचाने वाले ही आपस में जान लेने पर उतारू हो जाएं, तो आम आदमी किस पर भरोसा करेगा?
फिलहाल पूरे मामले में पुलिस जांच जारी है और क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।

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