गंगा घाट तो बना दिए, लेकिन श्रद्धालु पहुंचेंगे कैसे? पार्किंग और आवागमन की व्यवस्था पर उठे सवाल: मैडम जी यह अर्द्धकुंभ है या फिर कुंभ

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–सिंह द्वार से डामकोठी तक नवनिर्मित घाटों की उपयोगिता पर सवाल, क्या बिना ठोस योजना के हो रहा निर्माण?

खबर डोज, हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में अर्द्धकुंभ के बजाय कुंभ की तैयारियों के नाम पर चल रहे विकास कार्यों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। कहीं सड़कों और डिवाइडरों के चौड़ीकरण को लेकर विवाद सामने आ रहा है, तो कहीं गंगा घाटों के निर्माण के बाद श्रद्धालुओं के आवागमन और वाहनों की पार्किंग को लेकर असमंजस की स्थिति नजर आ रही है। ताजा मामला सिंहद्वार से लेकर डामकोठी तक बनाए गए गंगा घाटों का है। घाटों का निर्माण तो करा दिया गया, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इन घाटों तक श्रद्धालु पहुंचेंगे कैसे?

घाटों तक पहुंचने का रास्ता क्या होगा?

हरिद्वार में देश के कोने-कोने से श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में लोग निजी चौपहिया वाहनों से आते हैं, जबकि कई श्रद्धालु रेलवे स्टेशन, बस अड्डे और सार्वजनिक परिवहन के माध्यम से धर्मनगरी पहुंचते हैं। ऐसे में सिंहद्वार से डामकोठी तक बने घाटों पर श्रद्धालुओं को पहुंचाने के लिए क्या व्यवस्था तैयार की गई है, यह सवाल अहम हो गया है।

क्या रेलवे स्टेशन और बस अड्डे से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए इन घाटों तक पहुंचने की विशेष परिवहन व्यवस्था होगी? यदि श्रद्धालु निजी वाहनों से पहुंचते हैं, तो उनके वाहन कहां खड़े होंगे? क्या उन्हें हरकी पैड़ी और आसपास की पार्किंग में वाहन खड़े कर इन घाटों तक पहुंचना होगा? यदि ऐसा है तो श्रद्धालुओं को अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। वहीं, हरकी पैड़ी में स्नान की परंपरा और धार्मिक आस्था के चलते बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहीं जाना पसंद करते हैं।

पहले भी उठे हैं विकास कार्यों पर सवाल

हरिद्वार में विकास कार्यों की उपयोगिता और उनकी योजना को लेकर सवाल पहले भी सामने आ चुके हैं। शहर में डिवाइडर चौड़ीकरण के मामले को लेकर विवाद हुआ था। विरोध और सवाल उठने के बाद मेला प्रशासन को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे। अब नए गंगा घाटों के निर्माण के बाद उनकी उपयोगिता, पहुंच मार्ग और पार्किंग व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।

स्थानीय नागरिकों के लिए शहर में पहले से ही कई गंगा घाट उपलब्ध हैं। ऐसे में नए घाटों के निर्माण का उद्देश्य क्या है और कुंभ के दौरान इनका उपयोग किस तरह सुनिश्चित किया जाएगा, इस पर मेला प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। केवल निर्माण करा देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि श्रद्धालुओं को वहां तक पहुंचने, सुरक्षित स्नान करने और वापस लौटने में किसी प्रकार की परेशानी न हो।

स्वयंसेवी संस्थाएं भी निभा सकती हैं जिम्मेदारी

हरिद्वार में कई स्वयंसेवी और धार्मिक संस्थाएं गंगा घाटों के निर्माण, रखरखाव और साफ-सफाई में रुचि दिखाती रही हैं। कई संस्थाएं अपने गुरु अथवा आराध्य के नाम पर घाटों का निर्माण कराने के साथ उनकी देखरेख की जिम्मेदारी भी उठाती हैं। ऐसे में घाटों के निर्माण के साथ उनके दीर्घकालिक रखरखाव की व्यवस्था पर भी विचार किया जाना चाहिए।

यदि नए घाटों पर नियमित सफाई, पर्याप्त रोशनी, सुरक्षा, निगरानी और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गईं, तो भविष्य में इन स्थानों पर अव्यवस्था पैदा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। सुनसान रहने वाले घाटों पर असामाजिक तत्वों की गतिविधियां बढ़ने का खतरा भी बना रह सकता है।

मेला प्रशासन को देना होगा जवाब

कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में करोड़ों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि सिंहद्वार से डामकोठी तक बनाए गए घाटों के लिए क्या विस्तृत कार्ययोजना तैयार की गई है? क्या यहां तक पहुंचने के लिए पर्याप्त मार्ग, पार्किंग, परिवहन, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के इंतजाम किए जाएंगे?

गंगा घाटों का निर्माण निश्चित रूप से उपयोगी हो सकता है, लेकिन उनकी वास्तविक उपयोगिता तभी साबित होगी, जब श्रद्धालुओं को वहां पहुंचने और स्नान करने की सुविधाएं मिलें। अब देखना यह है कि मेला प्रशासन इन सवालों का जवाब देता है या फिर करोड़ों की लागत से तैयार होने वाले ये घाट अपनी उपयोगिता साबित करने के लिए इंतजार करते रहेंगे।

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