रुड़की में कहां है चालानी ड्रामा करने वाली सीपीयू, रुड़की के रामनगर बाजार में सड़क के बीचों-बीच खड़ी कारों से यातायात बेहाल
-त्योहारी सीजन में यातायात व्यवस्था सुधारने की जिम्मेदारी, लेकिन बीच सड़क खड़े वाहनों पर कार्रवाई को लेकर उठे सवाल
खबर डोज, रुड़की। जनपद हरिद्वार के रुड़की शहर में यातायात व्यवस्था को लेकर सीपीयू की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। शहर के बाजारों में सड़क के बीचों-बीच कारें खड़ी होने से जहां यातायात प्रभावित हो रहा है, वहीं इन वाहनों के खिलाफ चालान की कार्रवाई नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि आखिर रुड़की में सीपीयू कहां है और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले इन वाहन चालकों पर कार्रवाई कब होगी?
त्योहारी सीजन में बाजारों में खरीदारों की भीड़ बढ़ने के साथ यातायात का दबाव भी बढ़ जाता है। ऐसे समय में यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखना सीपीयू और ट्रैफिक पुलिस की अहम जिम्मेदारी है। इसके बावजूद बाजार की सड़कों पर बीचों-बीच खड़ी कारें व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर कर रही हैं। सड़क पर इस तरह वाहन खड़े होने से दूसरे वाहन चालकों को निकलने में परेशानी होती है और जाम की स्थिति बनने की आशंका बनी रहती है।
चालान के नाम पर कार्रवाई में भेदभाव के सवाल
यातायात नियमों का पालन कराने के लिए पुलिस की ओर से समय-समय पर चालान की कार्रवाई की जाती है। लेकिन यदि बाजार की मुख्य सड़कों पर खुलेआम वाहन खड़े रहते हैं और उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं होती, तो पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। आम वाहन चालकों से नियमों का पालन कराने वाली पुलिस को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि सड़क पर यातायात बाधित करने वाले वाहनों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई हो।
त्योहारी सीजन में व्यवस्था सुधारने की जरूरत
त्योहारी सीजन को देखते हुए रुड़की के प्रमुख बाजारों में यातायात व्यवस्था दुरुस्त करना जरूरी है। इसके लिए सीपीयू और ट्रैफिक पुलिस को नियमित गश्त करने, सड़क पर अवैध रूप से खड़े वाहनों को हटवाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने की आवश्यकता है।
अब देखने वाली बात होगी कि रुड़की पुलिस बाजारों में सड़क के बीच खड़ी कारों के खिलाफ कार्रवाई कर यातायात व्यवस्था सुधारती है या फिर चालान की कार्रवाई तक ही सीमित रहती है। फिलहाल, बाजारों में यातायात व्यवस्था को लेकर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

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