देहरादून में सूचना विभाग की झांकी का जलवा बरकरार, गणतंत्र दिवस पर हैट्रिक के साथ प्रथम स्थान

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खबर डोज, देहरादून। गणतंत्र दिवस के अवसर पर परेड ग्राउंड देहरादून में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में सूचना विभाग की झांकी ने एक बार फिर अपनी उत्कृष्ट प्रस्तुति से सभी का ध्यान आकर्षित किया। ‘‘रजत जयंती एवं शीतकालीन धार्मिक यात्रा व पर्यटन’’ विषय पर आधारित इस झांकी को निर्णायकों की ओर से प्रथम स्थान प्रदान किया गया। उल्लेखनीय है कि सूचना विभाग की झांकी ने लगातार तीसरी बार राज्य स्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में प्रथम स्थान हासिल कर यह उपलब्धि अपने नाम की है।
झांकी के माध्यम से उत्तराखण्ड के गठन के 25 गौरवशाली वर्षों की विकास यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। झांकी के प्रथम भाग में गंगा मंदिर, मुखवा को दर्शाया गया, जो माँ गंगा का शीतकालीन प्रवास स्थल है। यह प्रस्तुति शीतकालीन धार्मिक यात्रा की महत्ता और राज्य सरकार द्वारा इसके प्रचार-प्रसार के प्रयासों को रेखांकित करती है।
झांकी के अग्रिम केबिन में उत्तराखण्ड गठन के 25 वर्षों की उपलब्धियों को प्रदर्शित किया गया, जिसमें राज्य की विकास यात्रा, सांस्कृतिक पहचान, आधारभूत ढांचे में हुए विस्तार और निरंतर प्रगति को सजीव रूप में दिखाया गया। यह भाग राज्य की रजत जयंती के गौरव को दर्शाता है।
झांकी के ट्रेलर भाग में उत्तराखण्ड को आयुर्वेद के अग्रणी राज्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। इसमें राज्य की समृद्ध औषधीय वनस्पतियों, जड़ी-बूटियों और प्राचीन चिकित्सा पद्धतियों को दर्शाया गया। ट्रेलर के द्वितीय खंड में उत्तराखण्ड की होम स्टे योजना को प्रदर्शित किया गया, जो ग्रामीण पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
इसके पश्चात झांकी में खरसाली स्थित यमुना मंदिर को दर्शाया गया, जो माँ यमुना का शीतकालीन धाम है। यह प्रस्तुति शीतकालीन चारधाम यात्रा की अवधारणा और धार्मिक पर्यटन को वर्षभर सक्रिय रखने के प्रयासों को उजागर करती है।
झांकी के अंतिम भाग में उठते हुए स्तंभों (पिलर्स) के माध्यम से उत्तराखण्ड की वर्ष-दर-वर्ष प्रगति को प्रतीकात्मक रूप से दिखाया गया, जो राज्य के सतत विकास और भविष्य की ओर बढ़ते कदमों का संदेश देता है। झांकी के पार्श्व भाग में उत्तराखण्ड में लागू किए गए नए कानूनों को प्रदर्शित किया गया, जो राज्य की सुदृढ़ कानून व्यवस्था और सुशासन के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
पूरी झांकी की पृष्ठभूमि में की गई पारंपरिक ऐंपण कला की सजावट ने उत्तराखण्ड की लोक कला और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों की विशेष सराहना बटोरी।
सूचना विभाग की इस झांकी ने न केवल राज्य की विकास यात्रा और उपलब्धियों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया, बल्कि उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यटन पहचान को भी राष्ट्रीय मंच पर सशक्त रूप से उजागर किया।

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