उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले बड़े पैमाने पर होंगे अधिकारियों के तबादले, लंबित आपराधिक मामलों वाले अधिकारियों पर भी नियम, डीएम, एसडीएम और पुलिस अधिकारियों पर रहेगा फोकस

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खबर डोज, देहरादून। उत्तराखंड में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां तेज होने की संभावना है। भारत निर्वाचन आयोग के स्थानांतरण संबंधी दिशा-निर्देशों के तहत चुनाव से जुड़े अधिकारियों की तैनाती और उनके कार्यकाल की समीक्षा की जाएगी। निर्धारित मानकों के अनुसार, एक ही जिले में लंबे समय से तैनात अधिकारियों को चुनाव से पहले स्थानांतरित करना होगा। इसका उद्देश्य चुनाव प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाए रखना है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिन अधिकारियों ने किसी जिले में तीन वर्ष की सेवा पूरी कर ली है, उनके स्थानांतरण की प्रक्रिया 31 मार्च 2027 तक पूरी की जानी है। यह व्यवस्था जिला प्रशासन के साथ पुलिस और चुनावी व्यवस्थाओं से जुड़े अन्य विभागों के अधिकारियों पर भी लागू हो सकती है। हालांकि, अलग-अलग श्रेणियों के अधिकारियों पर लागू प्रावधानों की पुष्टि संबंधित निर्वाचन आयोग के निर्देशों से की जानी आवश्यक है।

डीएम, एसडीएम और पुलिस अधिकारियों पर रहेगा फोकस

चुनाव से पहले अधिकारियों की तैनाती की समीक्षा में जिलाधिकारी (डीएम), उपजिलाधिकारी (एसडीएम), तहसीलदार और खंड विकास अधिकारियों के साथ पुलिस अधिकारियों को भी शामिल किया गया है। इसके अलावा आबकारी और परिवहन विभाग से जुड़े अधिकारियों की तैनाती भी निर्धारित मानकों के आधार पर जांची जाएगी।

निर्देशों के तहत चुनाव से सीधे जुड़े अधिकारियों को उनके गृह जिले में तैनात रखने और एक ही स्थान पर लंबे समय तक सेवा देने के मामलों की समीक्षा की जाएगी। जिन अधिकारियों का निर्धारित कार्यकाल पूरा हो चुका है, उनके स्थानांतरण पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सेवानिवृत्ति के करीब अधिकारियों को मिल सकती है छूट

स्थानांतरण नीति में कुछ श्रेणियों के अधिकारियों को राहत दिए जाने का भी उल्लेख है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, 31 मार्च 2027 तक सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारियों को निर्धारित शर्तों के अधीन स्थानांतरण से छूट मिल सकती है। डॉक्टरों, इंजीनियरों, शिक्षकों और राज्य मुख्यालय में तैनात कर्मचारियों के संबंध में भी अलग प्रावधान लागू हो सकते हैं।

हालांकि, इन श्रेणियों में छूट स्वतः लागू मानी जाए या नहीं, यह संबंधित आदेशों और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगा।

चुनावी सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों की भी होगी समीक्षा

विधानसभा चुनाव के दौरान कानून-व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले पुलिस अधिकारियों की तैनाती भी निर्वाचन आयोग के मानकों के अनुरूप सुनिश्चित की जाएगी। पुलिस रेंज स्तर के अधिकारियों से लेकर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों तक के कार्यकाल और तैनाती की समीक्षा की जा सकती है।

चुनाव प्रक्रिया में किसी भी तरह के पक्षपात की आशंका दूर करने और प्रशासनिक व्यवस्था को निष्पक्ष बनाए रखने के लिए अधिकारियों के स्थानांतरण को महत्वपूर्ण माना जाता है।

लंबित आपराधिक मामलों वाले अधिकारियों पर भी नियम

उपलब्ध विवरण के मुताबिक, जिन अधिकारियों के खिलाफ आधिकारिक कार्यों से संबंधित आपराधिक मामला अदालत में लंबित है, उन्हें चुनाव संबंधी जिम्मेदारी सौंपने पर भी निर्धारित नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा। चुनावी ड्यूटी में लापरवाही या अनियमितताओं के मामलों में कार्रवाई का सामना कर चुके अधिकारियों के संबंध में भी आयोग के लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्णय लिया जाएगा।

पांच राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव

वर्ष 2027 में उत्तराखंड के साथ उत्तर प्रदेश, पंजाब, गोवा और मणिपुर में भी विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में चुनावी राज्यों में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों की तैनाती निर्वाचन आयोग के लिए महत्वपूर्ण विषय रहेगा।

उत्तराखंड में भी निर्धारित मानकों के अनुसार अधिकारियों के कार्यकाल की समीक्षा और स्थानांतरण की प्रक्रिया चुनाव से पहले पूरी करनी होगी। हालांकि, वास्तविक तबादलों की संख्या और अधिकारियों की अंतिम सूची संबंधित विभागों के आदेश जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।

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