लाइजनर नहीं सुधार पा रहे अस्पताल की छवि, छेड़छाड़ के एक और मुकदमे के साथ महिला अस्पताल (NPPL) के गुप्ता जी तो गए, दर्जनभर से अधिक मुकदमों वाले व्यक्ति की तैनाती पर उठे सवाल, घटना के बाद से प्रबंधन सवालों के घेरे में

–महिला कर्मचारी ने नगर कोतवाली में दर्ज कराया मुकदमा, शिकायत में अभद्रता, छेड़छाड़ और धमकी देने के गंभीर आरोप, आखिर किस आधार पर अस्पताल में दी गई थी सुपरवाइजर की जिम्मेदारी?
खबर डोज, हरिद्वार। हरिद्वार का चर्चित महिला अस्पताल (NPPL) एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। अस्पताल में तैनात सुपरवाइजर विक्की गुप्ता के खिलाफ महिला कर्मचारी की शिकायत पर नगर कोतवाली में छेड़छाड़ समेत अन्य आरोपों में एक और मुकदमा दर्ज हुआ है। लगातार सामने आ रहे विवादों के बीच अब अस्पताल प्रबंधन की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की नियुक्ति से पहले किए जाने वाले पुलिस सत्यापन पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।
कोतवाली नगर प्रभारी निरीक्षक कुंदन सिंह राणा के मुताबिक महिला अस्पताल में कार्यरत एक महिला कर्मचारी ने पुलिस को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि 14 सितंबर 2026 को उसकी रात्रि ड्यूटी के दौरान सुपरवाइजर विक्की गुप्ता बादशाह ने उसके साथ अभद्र व्यवहार किया। शिकायतकर्ता के मुताबिक, रात करीब तीन बजे उसके साथ आपत्तिजनक व्यवहार किया गया। विरोध करने पर गाली-गलौज की गई और उसे नौकरी से निकलवाने समेत गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी गई।
महिला कर्मचारी ने अपनी शिकायत में यह भी कहा है कि आरोपी की हरकतों से वह मानसिक रूप से परेशान है और उसे अपनी तथा अपने परिवार की सुरक्षा को लेकर डर बना हुआ है। पीड़िता ने पुलिस से मामले में कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है। शिकायत के आधार पर नगर कोतवाली पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
गौरतलब है कि महिला अस्पताल NPPL में इससे पहले भी इसी सुपरवाइजर को लेकर विवाद सामने आ चुके हैं। उस पर महिला कर्मचारियों के साथ अनुचित व्यवहार और अन्य गंभीर आरोप लगते रहे हैं। अब एक महिला कर्मचारी की ओर से मुकदमा दर्ज कराए जाने के बाद अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी और जवाबदेही पर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
दर्जनभर से अधिक मुकदमों के बावजूद कैसे मिली तैनाती?
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या अस्पताल में सुपरवाइजर जैसे जिम्मेदार पद पर किसी व्यक्ति को तैनात करने से पहले उसके आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की गई थी? यदि आरोपी के खिलाफ वास्तव में दर्जनभर से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, तो फिर ऐसे व्यक्ति को महिला अस्पताल में जिम्मेदारी सौंपने के पीछे क्या आधार रहा? क्या NPPL प्रबंधन ने नियुक्ति से पहले पुलिस सत्यापन कराया था या फिर बिना समुचित जांच के ही तैनाती कर दी गई?
महिला अस्पताल में इलाज के लिए रोजाना बड़ी संख्या में महिलाएं और प्रसूताएं पहुंचती हैं। ऐसे संवेदनशील संस्थान में महिला कर्मचारियों की सुरक्षा और सम्मान सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। ऐसे में लगातार सामने आ रहे आरोप अस्पताल प्रबंधन के लिए भी गंभीर सवाल बन गए हैं।
अब देखना होगा कि पुलिस जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और NPPL प्रबंधन इस मामले में संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।

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