छवि सुधारने वाले NPPL के लाइजनर भी नहीं संभाल पाए सुपरवाइजर: खुद को डॉक्टर बताकर महिलाओं को देता था मोबाइल नंबर, कर्मचारी ही नहीं प्रसूताओं की तीमारदारों से भी छेड़छाड़ के आरोप

ख़बर शेयर करें -

-हरिद्वार महिला अस्पताल में महिला सुरक्षा पर बड़ा सवाल, शिकायत के बाद सुपरवाइजर को हटाने की बात कह रहे NPPL निदेशक

खबर डोज, हरिद्वार। हरिद्वार का महिला अस्पताल एक बार फिर गंभीर आरोपों को लेकर सुर्खियों में है। अस्पताल में पीपीपी (पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप) मोड पर स्वास्थ्य सेवाओं का संचालन कर रही कंपनी NPPL के एक सुपरवाइजर पर महिला कर्मचारी के साथ कथित छेड़छाड़ के अलावा प्रसूताओं के साथ आने वाली महिला तीमारदारों से भी अभद्र व्यवहार करने और उन्हें परेशान करने के आरोप लगे हैं। अस्पताल परिसर में महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े इन आरोपों ने NPPL प्रबंधन से लेकर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी व्यवस्था तक पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि संबंधित सुपरवाइजर अस्पताल में आने वाली महिलाओं के सामने खुद को डॉक्टर बताकर उनसे संपर्क बढ़ाता था। महिला तीमारदारों का दावा है कि वह गर्भवती महिलाओं और उनके साथ अस्पताल में रुकी अन्य महिलाओं को अपना मोबाइल नंबर देता था और बाद में उनसे आपत्तिजनक बातचीत करता था। आरोप है कि कुछ महिलाओं के साथ उसने अशोभनीय हरकतें भी कीं।

खुद को डॉक्टर बताकर महिलाओं को नंबर देने का आरोप

महिला तीमारदारों की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक, संबंधित सुपरवाइजर अस्पताल में अपनी स्थिति का गलत इस्तेमाल कर महिलाओं से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश करता था। एक महिला तीमारदार ने आरोप लगाया कि सुपरवाइजर ने उसे गलत तरीके से छुआ। इतना ही नहीं, महिलाओं को अस्पताल के ऐसे कोनों में सोने के लिए दबाव डालने का भी आरोप है, जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे हुए थे।

यदि इन आरोपों की पुष्टि होती है तो यह केवल किसी कर्मचारी के अनुचित व्यवहार का मामला नहीं, बल्कि अस्पताल में भर्ती महिलाओं और उनके परिजनों की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर चूक का विषय होगा।

शिकायत करने वाली महिला कर्मचारी को नौकरी से निकालने की धमकी!

मामले में अस्पताल की एक महिला कर्मचारी ने भी संबंधित सुपरवाइजर पर छेड़छाड़ और अनुचित व्यवहार के आरोप लगाए हैं। पीड़िता का दावा है कि जब उसने इस संबंध में आवाज उठाई और शिकायत की तो उसे न्याय दिलाने के बजाय नौकरी से निकालने की धमकी दी गई।

ऐसे में सवाल उठता है कि जिस अस्पताल में महिला कर्मचारी ही खुद को सुरक्षित महसूस नहीं कर रही हैं, वहां भर्ती प्रसूताओं और उनके साथ आने वाली महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन निभा रहा है? क्या अस्पताल में महिलाओं की शिकायत सुनने और उन पर कार्रवाई करने के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था है?

पहले भी शिकायतें मिलने का दावा, प्रबंधन की भूमिका पर सवाल

बताया जा रहा है कि संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ पहले भी शिकायतें सामने आई थीं, लेकिन आरोप है कि NPPL प्रबंधन ने उन्हें गंभीरता से नहीं लिया। NPPL निदेशक मनोज मिश्रा की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। दावा किया जा रहा है कि सुपरवाइजर को प्रबंधन का करीबी माना जाता था और इसी कारण उसके खिलाफ शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

इसके अलावा, जिन वार्डों में पुरुषों के प्रवेश पर प्रतिबंध है, वहां भी उसके बेरोकटोक जाने के आरोप लगाए गए हैं। संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ पूर्व में कई मुकदमे दर्ज होने की बात भी कही जा रही है। हालांकि, इन आरोपों और दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है। पुलिस जांच और संबंधित अभिलेखों की पड़ताल के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

पुलिस तक पहुंचा मामला, मुकदमा दर्ज होने का इंतजार

मामले में पुलिस को शिकायत दिए जाने की जानकारी सामने आई है। खबर लिखे जाने तक मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई थी। पुलिस की ओर से बताया गया कि पीड़ित पक्ष के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और मामले में जल्द मुकदमा दर्ज किया जाएगा। अब देखना होगा कि पुलिस इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करती है और आरोपों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।

NPPL निदेशक बोले—लिखित शिकायत के बाद सुपरवाइजर को हटाया

वहीं, NPPL के निदेशक मनोज मिश्रा ने बताया कि संबंधित सुपरवाइजर के खिलाफ लिखित शिकायत मिलने के बाद उसे हटा दिया गया है। हालांकि, सवाल यह है कि यदि पहले भी शिकायतें मिली थीं तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की गई? क्या केवल सुपरवाइजर को हटाना पर्याप्त है या पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी भी तय की जाएगी?

स्वास्थ्य विभाग की निगरानी पर भी उठे सवाल

महिला अस्पताल का संचालन भले ही पीपीपी मोड पर निजी कंपनी के हाथों में हो, लेकिन अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं की निगरानी की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की भी है। अस्पताल के पीएमएस डॉ. राजेश गुप्ता पर भी निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि अस्पताल में महिला सुरक्षा, कर्मचारियों की शिकायतों और मरीजों के परिजनों की सुरक्षा को लेकर अब तक क्या व्यवस्था बनाई गई है।

गौरतलब है कि महिला अस्पताल पहले भी प्रसूताओं की मौत, इलाज में कथित लापरवाही, कर्मचारियों के वेतन विवाद और स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी को लेकर चर्चा में रहा है। अब महिला कर्मचारी और महिला तीमारदारों से कथित छेड़छाड़ के आरोपों ने अस्पताल की कार्यप्रणाली को एक बार फिर कठघरे में खड़ा कर दिया है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि इलाज और सुरक्षित प्रसव की उम्मीद लेकर महिला अस्पताल पहुंचने वाली महिलाओं की सुरक्षा की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? क्या स्वास्थ्य विभाग और NPPL प्रबंधन इस मामले में केवल कार्रवाई का आश्वासन देंगे या आरोपों की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ ठोस कदम भी उठाएंगे?

You cannot copy content of this page