ये तो होना ही था: कोटद्वार की चर्चित माही पैथोलॉजी लैब पर फिर उठे सवाल, मरीज को थमा दी गलत रिपोर्ट, कोविड काल में भी लग चुके हैं गंभीर आरोप, देखिए वायरल वीडियो

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खबर डोज, कोटद्वार। जनपद पौड़ी गढ़वाल में स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जिले में संचालित निजी पैथोलॉजी लैबों की मॉनिटरिंग और जांच व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के नाम पर चुप्पी साधे हुए हैं। इसी बीच कोटद्वार की चर्चित माही पैथोलॉजी लैब एक बार फिर विवादों में आ गई है। इस बार लैब पर एक मरीज को गलत जांच रिपोर्ट देने का आरोप लगा है, जिसके बाद सोशल मीडिया पर मामला तेजी से वायरल हो रहा है।

सूत्रों के मुताबिक मरीज ने सामान्य जांच के लिए माही पैथोलॉजी लैब में सैंपल दिया था। आरोप है कि लैब द्वारा जारी की गई रिपोर्ट में गंभीर स्वास्थ्य समस्या दर्शा दी गई, जिससे मरीज और उसके परिजन घबरा गए। बाद में जब दूसरी लैब में दोबारा जांच कराई गई तो रिपोर्ट पूरी तरह अलग निकली। इसके बाद मरीज पक्ष ने माही पैथोलॉजी लैब की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है। कोविड काल के दौरान भी माही पैथोलॉजी लैब चर्चाओं में रही थी। उस समय भी जांच रिपोर्टों को लेकर कई तरह की शिकायतें सामने आई थीं। आरोप लगे थे कि रिपोर्टों में भारी लापरवाही बरती जा रही है, लेकिन मामला कुछ दिन चर्चा में रहने के बाद ठंडे बस्ते में चला गया। अब एक बार फिर गलत रिपोर्ट का मामला सामने आने से लोगों का गुस्सा बढ़ता नजर आ रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि पैथोलॉजी रिपोर्ट किसी भी मरीज के इलाज का सबसे अहम आधार होती है। यदि रिपोर्ट गलत आती है तो मरीज को गलत दवाइयां दी जा सकती हैं, जिससे उसकी जान तक खतरे में पड़ सकती है। ऐसे मामलों में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी बनती है कि संबंधित लैब की जांच कर सख्त कार्रवाई की जाए।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि जिले में कई निजी लैब बिना पर्याप्त मानकों के संचालित हो रही हैं। कई लैबों में प्रशिक्षित स्टाफ तक नहीं है, जबकि मशीनों की गुणवत्ता और जांच प्रक्रिया पर भी सवाल उठते रहे हैं। बावजूद इसके स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर निरीक्षण करने के बजाय केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित दिखाई देता है।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे मामले के बाद अब लोग स्वास्थ्य विभाग से जवाब मांग रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते निजी लैबों पर सख्ती नहीं की गई तो भविष्य में किसी बड़े हादसे से इंकार नहीं किया जा सकता। वहीं कुछ लोगों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और संबंधित लैब का लाइसेंस निरस्त करने की मांग भी उठाई है।

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन सवाल यह खड़ा हो रहा है कि आखिर मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वालों पर कार्रवाई कब होगी? क्या स्वास्थ्य विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है या फिर जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी यूं ही जारी रहेगी।

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