वाह! महिला अस्पताल में इलाज से ज्यादा छवि सुधारने की चिंता? NPPL में लाइजनरों की भूमिका पर उठे सवाल

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–बड़े मामलों में चुप्पी, छोटी-छोटी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के आरोप, स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में

खबर डोज, हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार का महिला अस्पताल (NPPL) एक बार फिर सवालों के घेरे में है। अस्पताल में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने और व्यवस्थाओं में सुधार करने के बजाय अब अस्पताल की छवि सुधारने के लिए लाइजनर रखे जाने को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। आरोप है कि अस्पताल में तैनात लाइजनर छोटी-छोटी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हैं, जबकि गंभीर मामलों में उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

महिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं, मरीजों की सुविधाओं और प्रबंधन की कार्यप्रणाली को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में सवाल यह है कि अस्पताल प्रबंधन की प्राथमिकता मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है या फिर अस्पताल की छवि को बेहतर दिखाना? यदि अस्पताल में व्यवस्थाएं दुरुस्त हैं तो फिर बार-बार उठने वाले सवालों का जवाब देने और शिकायतों का समाधान करने की जरूरत क्यों पड़ रही है?

आरोप यह भी हैं कि छोटी घटनाओं को प्रमुखता से सामने लाकर अस्पताल की बेहतर तस्वीर पेश करने की कोशिश की जाती है, लेकिन जब गंभीर मामले सामने आते हैं तो जिम्मेदारों की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं मिल पाता। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और लाइजनरों की नियुक्ति के उद्देश्य को लेकर अस्पताल प्रबंधन का पक्ष सामने आना भी जरूरी है।

स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर भी सवाल

महिला अस्पताल से जुड़े मामलों में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी चर्चा का विषय बनी हुई है। यदि अस्पताल में मरीजों को इलाज से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है या प्रबंधन स्तर पर कोई लापरवाही सामने आती है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारी तय करना विभाग का दायित्व है। ऐसे मामलों में कार्रवाई नहीं होने से निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन इन सवालों पर क्या जवाब देते हैं। मरीजों को बेहतर इलाज, पारदर्शी व्यवस्था और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि अस्पताल की छवि सुधारने से पहले वास्तविक समस्याओं का समाधान किया जाए।

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