स्टेशन रोड की दुकानें हटाने के विरोध में कोटद्वार बाजार बंद, परिवार समेत तहसील पहुंचे व्यापारी, देखिए वीडियो

ख़बर शेयर करें -

वर्षों से कारोबार कर रहे खोखा संचालकों ने मुख्यमंत्री से लगाई पुनर्वास की गुहार, व्यापार मंडल ने पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की

खबर डोज, कोटद्वार। कोटद्वार रेलवे स्टेशन के बाहर वर्षों से कारोबार कर रहे खोखा संचालकों और दुकानदारों को हटाने के नोटिस के विरोध में व्यापारियों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। मंगलवार को व्यापारियों ने बाजार बंद रखकर विरोध जताया। इसके बाद बड़ी संख्या में व्यापारी अपने परिवारों के साथ जुलूस की शक्ल में तहसील पहुंचे और प्रशासन के समक्ष अपनी मांगें रखीं। व्यापारियों ने स्पष्ट कहा कि वर्षों से यहां कारोबार कर रहे छोटे दुकानदारों को हटाने से पहले उनके पुनर्वास और वैकल्पिक व्यवस्था की जाए।

आंदोलनरत व्यापारियों का कहना है कि स्टेशन रोड क्षेत्र में कई परिवार लंबे समय से छोटी-छोटी दुकानें और खोखे संचालित कर अपनी आजीविका चला रहे हैं। अब पीडब्ल्यूडी विभाग की ओर से दुकानों और खोखों को हटाने के नोटिस दिए जाने के बाद उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। व्यापारियों का आरोप है कि बिना पुनर्वास की व्यवस्था किए उन्हें हटाना उनके परिवारों के भविष्य के साथ अन्याय होगा।

मंगलवार को व्यापारियों ने एकजुट होकर बाजार बंद कराया। इसके बाद व्यापारी परिवारों के साथ जुलूस की शक्ल में तहसील पहुंचे। इस दौरान व्यापारियों ने प्रशासन से मामले में सकारात्मक समाधान निकालने की मांग की। प्रदर्शन में प्रभावित दुकानदारों के परिवार के सदस्य भी शामिल रहे।

मुख्यमंत्री से हस्तक्षेप की मांग

मामले को लेकर नगर उद्योग व्यापार मंडल कोटद्वार की ओर से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की गई है। व्यापार मंडल के अध्यक्ष प्रवीण भाटिया ने बताया कि प्रभावित व्यापारियों की समस्या को मुख्यमंत्री के संज्ञान में लाया गया है। पत्र के माध्यम से मांग की गई है कि वर्षों से कारोबार कर रहे खोखा संचालकों को उजाड़ने के बजाय उनके लिए उचित पुनर्वास की व्यवस्था की जाए।

व्यापार मंडल के अनुसार, इन खोखा संचालकों में कई ऐसे व्यापारी हैं जो करीब 72 वर्षों से नगर पालिका अथवा संबंधित विभाग को तहबाजारी शुल्क देते आ रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय तक शुल्क जमा करने के बावजूद अब अचानक हटाए जाने की कार्रवाई से छोटे व्यापारियों के सामने गंभीर आर्थिक संकट पैदा हो गया है।

‘दुकानें हटाने से पहले पुनर्वास जरूरी’

व्यापार मंडल का कहना है कि स्टेशन रोड के दुकानदारों में अधिकांश छोटे कारोबारी हैं और इन्हीं दुकानों से उनके परिवारों का भरण-पोषण होता है। ऐसे में यदि दुकानों को हटा दिया जाता है तो इन परिवारों की आय का एकमात्र साधन भी समाप्त हो जाएगा।

व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि विकास कार्यों के साथ प्रभावित लोगों के हितों का भी ध्यान रखा जाए। दुकानों को हटाने से पहले वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए, ताकि व्यापारी अपना कारोबार जारी रख सकें और उनके परिवारों की रोजी-रोटी प्रभावित न हो।

आंदोलन के आगे बढ़ने के संकेत

रेलवे स्टेशन के बाहर दुकानों और खोखों को हटाने के नोटिस के बाद से व्यापारी लगातार आंदोलन कर रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि वे विकास कार्यों के विरोध में नहीं हैं, लेकिन वर्षों से कारोबार कर रहे छोटे दुकानदारों को बिना पुनर्वास के हटाया जाना स्वीकार नहीं किया जाएगा।

व्यापार मंडल ने मुख्यमंत्री से मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर संबंधित विभागों को प्रभावित व्यापारियों के पुनर्वास के संबंध में आवश्यक निर्देश देने की मांग की है। अब सभी की नजर सरकार और प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी है। व्यापारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।

You cannot copy content of this page