हरिद्वार समेत तीन अन्य जिलों के जिला अस्पताल शिफ्ट करने का विरोध तो सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर तैनात चिकित्सकों को पर्वतीय क्षेत्रों में तैनाती देने की मांग, आंदोलन की दी चेतावनी

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चिकित्सकों की 11 सूत्रीय मांगों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री को ज्ञापन, 15 दिन में समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

खबर डोज, हरिद्वार। उत्तराखंड के सरकारी चिकित्सकों की लंबे समय से लंबित विभिन्न मांगों को लेकर प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ ने स्वास्थ्य मंत्री को पत्र भेजकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। संघ ने स्थानांतरण, एसडीएसीपी, डीपीसी, दुर्गम-सुगम क्षेत्र निर्धारण, पदों में वृद्धि, चिकित्सकों की सुरक्षा और आवास सहित कुल 11 मांगें उठाई हैं। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर मांगों का समाधान नहीं किया गया तो संगठन आंदोलन के लिए बाध्य होगा।

प्रांतीय चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा संघ उत्तराखंड के महासचिव डॉ. यशपाल सिंह तोमर और अध्यक्ष डॉ. रमेश कुंवर की ओर से 24 अगस्त 2026 को स्वास्थ्य मंत्री को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि चिकित्सकों की कई मांगें लंबे समय से शासन स्तर पर लंबित हैं। पूर्व में भी संघ की ओर से पत्राचार के माध्यम से शासन को मांगों से अवगत कराया जा चुका है, लेकिन अभी तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से चिकित्सकों में रोष व्याप्त है।

स्थानांतरण में संशोधन पूरी तरह लागू करने की मांग

संघ ने कहा कि वर्तमान में किए गए चिकित्सकों के स्थानांतरण के बाद कई स्थानों पर असंगत स्थिति पैदा हुई है। चिकित्सालयों में रिक्त पदों के बावजूद नियुक्तियां नहीं की गईं और चिकित्सकों का असंगत स्थानांतरण किया गया। इसके अलावा स्थानांतरण में किए गए संशोधनों को भी पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।

संघ ने मांग की है कि बीमार चिकित्सकों को पर्वतीय क्षेत्रों में स्थानांतरित किए जाने तथा युगल दंपती चिकित्सकों को अलग-अलग स्थानों पर भेजे जाने जैसी विसंगतियों को दूर करते हुए स्थानांतरण संबंधी संशोधनों को पूरी तरह लागू किया जाए।

वर्षों से अटका SDACP, चिकित्सकों में नाराजगी

चिकित्सकों ने SDACP (Special Dynamic Assured Career Progression) का लाभ दिए जाने की मांग को भी प्रमुखता से उठाया है। संघ का कहना है कि एसडीएसीपी कई वर्षों से लंबित है। लाभ वर्ष में दो बार बैठक कर अनिवार्य सेवा अवधि पूरी कर चुके पात्र चिकित्सकों को इसका लाभ दिया जाना था, लेकिन पात्र चिकित्सकों को अभी तक इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

संघ ने कहा कि दो-ढाई साल से अधिक समय से एसडीएसीपी को लटकाया जाना खेदजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। एसडीएसीपी में पूर्ण सेवा अवधि में एक बार छूट दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन उसका लाभ भी कई वर्षों से चिकित्सकों को नहीं दिया जा रहा है।

सरकार के स्तर पर डीपीसी और एसडीएसीपी को लेकर पहले भी प्रक्रिया आगे बढ़ाए जाने की बात सामने आती रही है।

डीपीसी के रिक्त पदों के सापेक्ष कराने की मांग

संघ ने मांग की है कि रिक्त पदों के सापेक्ष प्रत्येक वर्ष डीपीसी कराई जानी चाहिए। पत्र में कहा गया है कि विभाग में वर्षों तक पद रिक्त रहने के बावजूद डीपीसी नहीं हो रही है।

संघ ने लंबित डीपीसी पर तत्काल उचित कार्रवाई करते हुए आदेश जारी करने, भविष्य में रोस्टर तैयार करने और समयबद्ध तरीके से रिक्त पदों के सापेक्ष डीपीसी कराने की मांग की है।

सुगम-दुर्गम क्षेत्र निर्धारण पर भी उठाए सवाल

संघ ने अल्मोड़ा जिला मुख्यालय, टिहरी जिला मुख्यालय, नैनीताल जिला मुख्यालय तथा मसूरी नगर क्षेत्र को दुर्गम से सुगम किए जाने का विरोध किया है। संघ के मुताबिक पूर्व में ये चारों स्थान दुर्गम श्रेणी में थे।

चिकित्सकों ने इन क्षेत्रों को स्थानांतरण तथा अन्य लाभों के लिए पुनः दुर्गम श्रेणी में शामिल किए जाने की मांग की है।

चिकित्सकीय पदों में वृद्धि की मांग

संघ ने एमओ, एसएमओ, एसीएमओ, जेसीएमओ, एडीएमओ और डायरेक्टर सहित विभिन्न चिकित्सकीय पदों में विभागीय आवश्यकता के अनुसार वृद्धि करने की मांग भी रखी है। संघ का कहना है कि चिकित्सकों की उपलब्धता और स्वास्थ्य सेवाओं की जरूरतों को देखते हुए पदों का पुनर्गठन एवं वृद्धि जरूरी है।

जिला चिकित्सालय को अन्यत्र स्थानांतरित करने का विरोध

संघ ने जिला चिकित्सालय को अन्यत्र स्थानांतरित करने का भी विरोध किया है। पत्र में कहा गया है कि चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग वर्ष 2013 से अलग-अलग प्रशासनिक सेवाएं हैं।

संघ के अनुसार यदि मुख्यालय में जिला चिकित्सालय नहीं होगा तो मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पोस्टमार्टम, वीआईपी ड्यूटी और मेडिकल बोर्ड के गठन सहित विभिन्न कार्यों में व्यावहारिक दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। साथ ही प्रशासनिक टकराव की संभावना भी बढ़ सकती है।

अस्पतालों में पुलिस चौकियों की मांग

चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर संघ ने प्रदेश के सभी स्थानीय चिकित्सालयों और राजकीय चिकित्सालयों में पुलिस चौकी स्थापित करने की मांग की है। चिकित्सकों का कहना है कि अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने से चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को सुरक्षित माहौल मिल सकेगा।

चिकित्सकों के लिए आवास की सुविधा

संघ ने प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, संयुक्त चिकित्सालय और जिला चिकित्सालय में स्वीकृत पदों के अनुरूप चिकित्सकों के लिए आवासीय सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।

संघ का कहना है कि कई स्थानों पर आवासीय परिसर उपलब्ध नहीं होने के कारण चिकित्सकों को समय पर आकस्मिक सेवाएं देने में कठिनाई होती है। विशेषकर पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में चिकित्सकों के लिए आवास की व्यवस्था स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी है।

पीजी सीटों में चिकित्सकों के लिए आरक्षण

उत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों पर पीएमएचएस के अभ्यर्थियों के लिए सीटें आरक्षित किए जाने की मांग भी संघ ने उठाई है। संघ का कहना है कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यरत चिकित्सकों के लिए यह व्यवस्था राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मददगार होगी।

सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर कार्यरत चिकित्सकों की तैनाती

संघ ने मांग की है कि जो चिकित्सक सेवानिवृत्ति के बाद संविदा पर सेवाएं दे रहे हैं, उन्हें पर्वतीय क्षेत्रों में ही तैनाती दी जाए। इससे पर्वतीय एवं दुर्गम क्षेत्रों में चिकित्सकों की कमी को दूर करने में मदद मिल सकती है।

स्नातकोत्तर के बाद दंत रोग विशेषज्ञों को पीजी भत्ता

संघ ने सेवा अवधि में स्नातकोत्तर करने वाले दंत रोग विशेषज्ञों को भी पीजी भत्ता दिए जाने की मांग की है। संघ के मुताबिक विशेषज्ञ चिकित्सकों को उनकी योग्यता और सेवा के अनुरूप प्रोत्साहन मिलना आवश्यक है।

15 दिन का अल्टीमेटम, आंदोलन की चेतावनी

पत्र के अंत में संघ ने कहा है कि उपरोक्त मांगों को लेकर वह पहले भी 6 अप्रैल 2026 और 27 जून 2026 को पत्र भेजकर शासन को अवगत करा चुका है, लेकिन वर्तमान तक मांगों का पूर्ण समाधान नहीं हुआ है और न ही उचित कार्रवाई की गई है। इससे चिकित्सकों में रोष व्याप्त है।

संघ ने स्वास्थ्य मंत्री से मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए तत्काल कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। साथ ही स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर संघ की मांगों का समाधान नहीं किया गया तो संगठन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

संघ के अध्यक्ष डॉ. रमेश कुंवर और महासचिव डॉ. यशपाल सिंह तोमर ने कहा कि चिकित्सक लगातार स्वास्थ्य सेवाओं में अपनी जिम्मेदारियां निभा रहे हैं, लेकिन लंबे समय से लंबित सेवा संबंधी मांगों का समाधान नहीं होने से चिकित्सकों में असंतोष बढ़ रहा है। अब शासन से मांगों पर समयबद्ध निर्णय की अपेक्षा है।

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