कच्चे बिल पर जीएसटी वसूली का आरोप, कोटद्वार के नए सुनार पर उठे सवाल, कब होगी कार्रवाई?

ख़बर शेयर करें -

खबर डोज, कोटद्वार। कोटद्वार में एक नए सुनार की दुकान से सामने आए कथित कच्चे बिल ने जीएसटी वसूली और बिलिंग व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ग्राहक को दिए गए कच्चे बिल के आगे और पीछे दर्ज विवरण में अंतर है। बिल के पीछे सोने की रकम के साथ मेकिंग चार्ज और जीएसटी जोड़कर पूरी राशि दर्शाई गई है।

जानकारी के मुताबिक कुछ महीने पहले कोटद्वार के मेन चौक क्षेत्र में एक नई ज्वेलरी की दुकान शुरू हुई है। संबंधित सुनार सोशल मीडिया रील्स के माध्यम से कम मेकिंग चार्ज में आभूषण उपलब्ध कराने का दावा भी करता नजर आता है। हालांकि, सामने आए बिल को लेकर अब इन दावों पर भी सवाल उठ रहे हैं।

बिल के आगे-पीछे अलग-अलग विवरण

सामने आए कच्चे बिल में कथित तौर पर आगे एक राशि दर्ज है, जबकि बिल के पीछे सोने की कीमत और अन्य शुल्क जोड़कर दूसरी राशि लिखी गई है। आरोप है कि सोने के रेट के साथ मेकिंग चार्ज और जीएसटी भी जोड़ा गया है। यही वजह है कि बिल की वैधता और उसमें दर्शाई गई जीएसटी राशि को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि बिल के पीछे दर्ज सोने के रेट और मेकिंग चार्ज के बीच अंतर बेहद कम है। ऐसे में ग्राहक से वास्तविक रूप से कितनी राशि वसूली गई और उसमें कितनी जीएसटी शामिल थी, यह जांच का विषय बन गया है।

कच्चे बिल पर जीएसटी, सरकारी खजाने में पहुंची या नहीं?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ग्राहक से जीएसटी के नाम पर रकम वसूली गई है, तो क्या संबंधित राशि सरकार के खाते में जमा भी की गई? केवल कच्चे बिल पर जीएसटी की राशि लिखे जाने से यह साबित नहीं होता कि वह राशि वास्तव में सरकार के राजस्व खाते में जमा हुई है। इसकी पुष्टि संबंधित विभाग द्वारा रिकॉर्ड, जीएसटी रिटर्न और बिक्री विवरण की जांच के बाद ही हो सकती है।

मामला सामने आने के बाद अब जीएसटी विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। यदि बिलिंग में नियमों का उल्लंघन या जीएसटी के नाम पर ग्राहकों से रकम वसूलने की पुष्टि होती है, तो संबंधित कारोबारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।

सोशल मीडिया दावों और वास्तविक बिलिंग की जांच जरूरी

एक ओर सोशल मीडिया पर कम मेकिंग चार्ज के दावे किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सामने आए बिल ने इन दावों की वास्तविकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में विभागीय जांच के जरिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि ग्राहक से किस आधार पर रकम वसूली गई, बिल किस प्रकार जारी किया गया और जीएसटी की राशि का लेखा-जोखा क्या है।

फिलहाल मामला जांच का विषय है और संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक कार्रवाई या जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिलिंग में वास्तव में जीएसटी नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

अब सवाल यही है—कच्चे बिल पर जीएसटी वसूली के इन आरोपों पर विभाग कब संज्ञान लेगा और बिलिंग की जांच कब होगी?

You cannot copy content of this page