अवैध खनन मामले में तहसील प्रशासन की भूमिका पर उठे सवाल, सूचना आयुक्त ने एसडीएम कोटद्वार पर लगाया 15 हजार का जुर्माना

खबर डोज, कोटद्वार। वर्ष 2020 में कोटद्वार में रिवर ट्रेनिंग के नाम पर हुए कथित अवैध खनन के मामले में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी से तहसील प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल सामने आए हैं। आरटीआई कार्यकर्ता मुजीब नैथानी की शिकायत पर हुई सुनवाई में सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर ने अभिलेखों की उपलब्धता और सूचनाएं उपलब्ध न कराए जाने के मामले में वर्तमान उपजिलाधिकारी कोटद्वार संदीप कुमार पर 15 हजार रुपये की शास्ति लगाए जाने के निर्देश दिए हैं।
मामला वर्ष 2020 का है, जब कोटद्वार क्षेत्र में रिवर ट्रेनिंग के नाम पर खनन किए जाने को लेकर शिकायतें सामने आई थीं। आरटीआई के माध्यम से मांगी गई सूचनाओं और आयोग में की गई शिकायत के दौरान यह तथ्य सामने आया कि तत्कालीन तहसीलदार द्वारा रिवर ट्रेनिंग एवं खनन से संबंधित निरीक्षण आख्याएं उपजिलाधिकारी कार्यालय को उपलब्ध कराई गई थीं, लेकिन वर्तमान में कार्यालय में इन अभिलेखों के उपलब्ध न होने की बात कही गई।
तहसीलदार की रिपोर्ट में अवैध खनन की पुष्टि
शिकायत के अनुसार, तहसीलदार स्तर से तैयार की गई एक निरीक्षण आख्या में अवैध खनन की पुष्टि किए जाने का उल्लेख था। आरोप है कि इस रिपोर्ट पर तत्कालीन उपजिलाधिकारी कार्यालय स्तर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। आरटीआई के तहत जानकारी मांगने पर संबंधित अभिलेख कार्यालय में उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई।
इसके अलावा सिंचाई विभाग द्वारा उपजिलाधिकारी कोटद्वार कार्यालय को भेजे गए पत्रों के संबंध में भी विवाद सामने आया। कार्यालय की ओर से इन पत्रों के उपलब्ध नहीं होने की बात कही गई, जबकि सिंचाई विभाग द्वारा संबंधित पत्रों की उपजिलाधिकारी कार्यालय में प्राप्ति का प्रमाण उपलब्ध कराया गया था।
तत्कालीन एसडीएम की तैनाती भी जांच के दायरे में
सूचना आयोग के समक्ष हुई सुनवाई में यह तथ्य सामने आया कि वर्ष 2020 में योगेश सिंह मेहरा कोटद्वार में उपजिलाधिकारी के पद पर तैनात थे। वहीं वर्तमान उपजिलाधिकारी संदीप कुमार द्वारा आयोग के समक्ष संबंधित अभिलेख उपलब्ध कराए जाने के संबंध में स्थिति स्पष्ट की गई।
आयोग ने उपलब्ध तथ्यों और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद पाया कि तहसीलदार कोटद्वार की रिवर ट्रेनिंग से संबंधित आख्याएं कार्यालय में उपलब्ध नहीं कराई गईं। इसी तरह सिंचाई विभाग द्वारा भेजे गए पत्रों के संबंध में भी कार्यालय रिकॉर्ड में उन्हें धारित नहीं बताया गया, जबकि विभाग की ओर से पत्रों की प्राप्ति का प्रमाण प्रस्तुत किया गया था।
एसडीएम पर 15 हजार रुपये की शास्ति
मामले में सूचना आयुक्त दिलीप सिंह कुंवर ने वर्तमान उपजिलाधिकारी कोटद्वार संदीप कुमार पर 15 हजार रुपये की शास्ति लगाए जाने के निर्देश दिए हैं। यह शास्ति दो किस्तों में देय होगी।
आरटीआई के जरिए सामने आए इस मामले ने सरकारी कार्यालयों में महत्वपूर्ण अभिलेखों के रखरखाव और सूचना के अधिकार के तहत मांगी जाने वाली सूचनाओं की उपलब्धता को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। आयोग की कार्रवाई के बाद संबंधित अधिकारियों और कार्यालयीय रिकॉर्ड की भूमिका एक बार फिर चर्चा में आ गई है।
जब खनन का मामला सामने आया, तब एसएसपी थे दिलीप सिंह कुंवर
इस पूरे मामले का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि जिस समय वर्ष 2020 में कोटद्वार में रिवर ट्रेनिंग के नाम पर अवैध खनन का मामला सामने आया था, उस दौरान दिलीप सिंह कुंवर गढ़वाल के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात थे। वर्तमान में वह सूचना आयुक्त के रूप में इस आरटीआई प्रकरण की सुनवाई कर रहे हैं।
आरटीआई के माध्यम से सामने आए तथ्यों और आयोग द्वारा की गई कार्रवाई के बाद अब वर्ष 2020 के इस कथित अवैध खनन प्रकरण में तहसील प्रशासन के स्तर पर तैयार किए गए अभिलेखों, उनकी उपलब्धता और उस समय की गई कार्रवाई को लेकर मामला फिर सुर्खियों में आ गया है।

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