पीपीपी मोड पर जाने के बाद महिला अस्पताल की बजी पीपड़ी, समय से सैलरी न मिलने पर डॉक्टर और कई कर्मचारी छोड़ चुके हैं नौकरी

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खबर डोज, हरिद्वार। हरिद्वार के 200 बेड के महिला अस्पताल को पीपीपी मोड पर संचालित किए जाने के बाद अब अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठने लगे हैं। समय पर वेतन नहीं मिलने से डॉक्टरों और कर्मचारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थिति यह है कि अस्पताल में कार्यरत कई डॉक्टर और कर्मचारी नौकरी छोड़ चुके हैं, जबकि जो कर्मचारी अभी सेवाएं दे रहे हैं, वे भी वेतन भुगतान को लेकर परेशान हैं।

अस्पताल से जुड़े सूत्रों के अनुसार कर्मचारियों को दो माह से अधिक समय से वेतन नहीं मिला है। लंबे समय से वेतन का भुगतान नहीं होने के कारण कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। वहीं कर्मचारियों की ओर से पीएफ को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। आरोप है कि पीपीपी मोड में जाने के बाद कर्मचारियों को वेतन और अन्य सुविधाओं को लेकर लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

बताया जा रहा है कि वेतन भुगतान को लेकर अस्पताल में पहले भी कई बार हंगामे की स्थिति बन चुकी है। अब डॉक्टरों ने भी समय पर वेतन नहीं मिलने की स्थिति में हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। डॉक्टरों और कर्मचारियों के लगातार नौकरी छोड़ने से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

वहीं अस्पताल के संचालन को लेकर शहर के कई लोगों द्वारा आर्थिक सहयोग किए जाने की भी बात सामने आई है। हालांकि, अब आर्थिक सहयोग करने वाले लोगों की ओर से भी हाथ खड़े किए जाने की चर्चा है। ऐसे में अस्पताल के संचालन और कर्मचारियों के वेतन भुगतान को लेकर स्थिति और गंभीर होती दिखाई दे रही है।

मामला स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचने के बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आरके सिंह ने अस्पताल के संचालन से जुड़े एनपीपीएल के डायरेक्टर को तलब किया है। सीएमओ ने मामले की जानकारी लेते हुए जल्द समाधान कराने के निर्देश दिए हैं।

सीएमओ डॉ. आरके सिंह ने बताया कि डॉक्टरों और कर्मचारियों के वेतन भुगतान को लेकर संबंधित संस्था से बातचीत की जा रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही डॉक्टरों और कर्मचारियों को सैलरी का भुगतान किया जाएगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि वेतन संकट का समाधान कब तक होता है और अस्पताल में लगातार सामने आ रही कर्मचारियों की कमी के बीच मरीजों को स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से कैसे उपलब्ध कराई जाएंगी। यदि जल्द स्थिति नहीं सुधरी तो महिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

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