हरिद्वार जिले में मुख्य उद्देश्य से भटकी सीपीयू, स्ट्रीट क्राइम रोकने की जगह चालान तक सिमटी कार्रवाई, सीपीयू गठन का यह था मुख्य उद्देश्य

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-हाइवे पर तैनाती के बावजूद सड़क अपराध और असामाजिक तत्वों पर निगरानी को लेकर उठ रहे सवाल

खबर डोज, हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस की सिटी पेट्रोल यूनिट (सीपीयू) जिस उद्देश्य के साथ गठित की गई थी, उस पर अब सवाल उठने लगे हैं। सीपीयू का मुख्य उद्देश्य शहरों में होने वाले स्ट्रीट क्राइम पर प्रभावी अंकुश लगाना, यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और असामाजिक तत्वों पर निगरानी रखना था। इसके लिए सीपीयू जवानों को आधुनिक बाइक और कैमरों जैसी सुविधाओं से लैस किया गया था। हालांकि, मौजूदा व्यवस्था में सीपीयू की भूमिका मुख्य रूप से यातायात नियमों के उल्लंघन पर चालान काटने तक सीमित होने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

उत्तराखंड में सीपीयू गठन का यह था मुख्य उद्देश्य

उत्तराखंड में सीपीयू की तैनाती देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, हल्द्वानी, काशीपुर और रुद्रपुर समेत प्रमुख शहरों में की गई है। इन शहरों में सड़कों पर लगातार पेट्रोलिंग और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना भी यूनिट की जिम्मेदारियों में शामिल रहा है। गठन के समय इसका उद्देश्य यह था कि पुलिस की मौजूदगी सड़कों पर दिखाई दे और अपराधियों तथा असामाजिक तत्वों में पुलिस का प्रभाव बना रहे।

बताया जाता है कि सीपीयू कर्मियों को यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई और चालान करने का अधिकार है। आरटीआई से सामने आई जानकारी के अनुसार, सीपीयू कर्मियों को उपनिरीक्षक (एसआई) अथवा उससे उच्च अधिकारी के समान चालान संबंधी अधिकार प्राप्त हैं। ऐसे में यातायात नियंत्रण के साथ-साथ अपराध नियंत्रण की जिम्मेदारी भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

वर्तमान में कई प्रमुख मार्गों और हाइवे पर सीपीयू की तैनाती दिखाई देती है, लेकिन आरोप है कि जवानों की प्राथमिकता सड़क अपराध की रोकथाम और असामाजिक तत्वों की निगरानी के बजाय वाहन चालकों के चालान काटने पर अधिक केंद्रित हो गई है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि सीपीयू का मूल उद्देश्य स्ट्रीट क्राइम पर अंकुश लगाना था, तो क्या वर्तमान व्यवस्था में उस उद्देश्य की नियमित समीक्षा की जा रही है। पुलिस विभाग के सामने अब यातायात कार्रवाई के साथ सीपीयू की मूल जिम्मेदारियों को भी प्रभावी तरीके से लागू करने की चुनौती है।

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