लालढांग रेंज में वन्यजीवों के कीमती अंगों का बड़ा घोटाला! आइवरी के 35 किलो से अधिक वजन का हिसाब गायब, मामला दर्ज

ख़बर शेयर करें -

-भौतिक सत्यापन में 15 दर्ज टुकड़ों में से मिले केवल पांच, 35.045 किलोग्राम वजन कम मिला, अज्ञात लोगों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता के तहत कार्रवाई की मांग

खबर डोज, कोटद्वार। पौड़ी गढ़वाल के लैंसडाउन वन प्रभाग की लालढांग रेंज में वन्यजीवों के अंगों (आइवरी/हाथी दांत) के भंडारण से जुड़ा गंभीर मामला सामने आया है। वन विभाग के भौतिक सत्यापन में सरकारी अभिलेखों में दर्ज आइवरी की मात्रा और वास्तविक भंडार में बड़ा अंतर मिला है। जांच के दौरान कुल 35.045 किलोग्राम वजन कम पाया गया। मामले में वन विभाग की ओर से अज्ञात लोगों के खिलाफ यमकेश्वर थाने में एफआईआर दर्ज कराई गई है।

यमकेश्वर थानाध्यक्ष अरविंद कुमार के मुताबिक 31 अक्टूबर को लालढांग रेंज के भंडार का भौतिक सत्यापन किया गया था। इस दौरान वन्यजीव अंग बाह्य (Ivory/Tusks) के भंडार अभिलेख यानी सी-17 पंजिका में दर्ज मात्रा का मिलान वास्तविक स्टॉक से किया गया।

सत्यापन में चौंकाने वाली स्थिति सामने आई। पंजिका में आइवरी के कुल 15 टुकड़े दर्ज थे, लेकिन मौके पर केवल पांच टुकड़े ही पाए गए। इसके अलावा कुल दर्ज वजन के सापेक्ष 35.045 किलोग्राम सामग्री कम मिली। इतनी बड़ी मात्रा में वन्यजीवों के कीमती अंगों का भंडार से कम मिलना वन विभाग की निगरानी और रखरखाव व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।

उप प्रभागीय वनाधिकारी लैंसडाउन वन प्रभाग कोटद्वार सुधीर कुमार की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्र में उल्लेख किया गया है कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 (यथासंशोधित 2023) की धारा 39 के तहत वन्यजीवों के ऐसे अंग राज्य सरकार की संपत्ति हैं। सरकारी भंडार से इनके गायब होने अथवा चोरी किए जाने के संबंध में अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता-2023 के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई करने का अनुरोध किया गया है।

प्रकरण में यमकेश्वर थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद अब जांच में यह पता लगाना महत्वपूर्ण होगा कि सरकारी अभिलेखों में दर्ज आइवरी के टुकड़े आखिर कहां गए? भंडार से इतनी बड़ी मात्रा कैसे गायब हुई और इसकी जिम्मेदारी किन अधिकारियों एवं कर्मचारियों की थी?

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि 35.045 किलोग्राम आइवरी का हिसाब कौन देगा? वन विभाग के भंडार की सुरक्षा, स्टॉक रजिस्टर के रखरखाव और समय-समय पर हुए सत्यापन की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।

You cannot copy content of this page