हरिद्वार: सीवर समस्या पर भड़का विवाद: जेई का विवादित रवैया, उच्चाधिकारियों पर भी टिप्पणी, डीएम साहब कब होगी गंगा प्रदूषण के विवादित जेई के खिलाफ कार्रवाई, पार्षद और जेई की रिकॉर्डिंग वायरल

खबर डोज, हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में गंगा की स्वच्छता और सीवर व्यवस्था को दुरुस्त रखने की जिम्मेदारी संभालने वाले उत्तराखंड जल संस्थान (गंगा प्रदूषण) के अधिकारियों की कार्यशैली पर अब गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। ताजा मामला कनखल क्षेत्र से सामने आया है, जहां जनप्रतिनिधि द्वारा जनता की समस्या उठाने पर संबंधित अधिकारी का रवैया न केवल लापरवाह बल्कि कथित रूप से अभद्र भी बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम हरिद्वार के कनखल स्थित रविदास बस्ती में पिछले करीब आठ महीनों से सीवर लाइन जाम होने की समस्या बनी हुई है। स्थानीय निवासियों को लगातार गंदगी, बदबू और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कई बार शिकायत करने के बावजूद जब समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो क्षेत्र के पार्षद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता भूपेंद्र कुमार ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित विभागीय अधिकारी से संपर्क साधा।
बताया जा रहा है कि पार्षद भूपेंद्र कुमार ने जब जल संस्थान के जेई (जूनियर इंजीनियर) सैनी जी से फोन पर बात कर सीवर लाइन की सफाई कराने का अनुरोध किया, तो उन्हें उम्मीद थी कि समस्या का जल्द समाधान निकलेगा। लेकिन इसके विपरीत जेई का रवैया टालमटोल वाला नजर आया। उन्होंने मौके पर कार्रवाई करने के बजाय पार्षद को अधिशासी अभियंता को पत्र लिखने की सलाह दे दी।
आरोप यह भी है कि बातचीत के दौरान अधिकारी ने अपने उच्चाधिकारियों के लिए भी अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया, जिससे विभागीय अनुशासन और कार्यसंस्कृति पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह न केवल विभागीय मर्यादा का उल्लंघन है, बल्कि जनता के प्रति जवाबदेही की कमी को भी दर्शाता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से चली आ रही सीवर समस्या के कारण क्षेत्र में हालात बदतर हो चुके हैं। बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है, जिससे संक्रामक बीमारियों का खतरा बना रहता है। बावजूद इसके विभागीय अधिकारी समस्या को गंभीरता से लेने के बजाय जिम्मेदारी से बचते नजर आ रहे हैं।
इस पूरे मामले ने एक बार फिर गंगा स्वच्छता के दावों की पोल खोल दी है। जहां एक ओर सरकार गंगा को निर्मल और अविरल बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं दूसरी ओर जमीनी स्तर पर जिम्मेदार अधिकारी अपनी भूमिका निभाने में नाकाम साबित हो रहे हैं।
अब सवाल यह उठता है कि आखिर ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी? क्या जनप्रतिनिधियों और आम जनता की शिकायतों को इसी तरह नजरअंदाज किया जाता रहेगा, या फिर उच्चाधिकारी इस मामले का संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाएंगे?
फिलहाल क्षेत्रीय जनता और जनप्रतिनिधि कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे आंदोलन का रास्ता भी अपना सकते हैं। सवाल यह भी उठता है कि डीएम साहब कब तक ऐसे बेलगाम अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।

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