डीजीपी साहब! रात में कहां गायब रहती है हरिद्वार की सीपीयू? मोबाइल स्नेचिंग की घटनाएं जारी, कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

-सुबह से शाम तक चालान काटने में जुटी सीपीयू, स्ट्रीट क्राइम पर अंकुश लगाने की जिम्मेदारी कौन निभाएगा? यातायात पुलिस और परिवहन विभाग भी कर रहे चालान
खबर डोज, हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में क्राइम कंट्रोल और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से तैनात सिटी पेट्रोल यूनिट (सीपीयू) की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि सीपीयू की टीमें सुबह से शाम तक मुख्य रूप से यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के चालान काटने में व्यस्त दिखाई देती हैं, जबकि मोबाइल स्नैचिंग सहित अन्य स्ट्रीट क्राइम की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने को लेकर उनकी सक्रियता सवालों के घेरे में है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर रात के समय सीपीयू की टीमें कहां रहती हैं और क्या अपराधी केवल दिन में ही वारदातों को अंजाम देते हैं?
स्ट्रीट क्राइम रोकना भी थी सीपीयू की जिम्मेदारी
सीपीयू के गठन का उद्देश्य केवल यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित कराना ही नहीं, बल्कि सड़क पर होने वाले अपराधों पर अंकुश लगाना और आमजन की सुरक्षा को मजबूत करना भी रहा है। पूर्व में चेन स्नेचिंग, मोबाइल छीनने और अन्य स्ट्रीट क्राइम की घटनाओं में आरोपी वारदात को अंजाम देकर तेजी से फरार हो जाते थे। ऐसी घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण और सड़कों पर पुलिस की सक्रिय मौजूदगी सुनिश्चित करने की जरूरत के बीच सीपीयू जैसी व्यवस्था को महत्वपूर्ण माना गया।
हालांकि, वर्तमान में सीपीयू की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों ने उसकी प्राथमिकताओं पर बहस छेड़ दी है। यदि टीमें मुख्य रूप से चालान काटने तक सीमित दिखाई देंगी, तो स्ट्रीट क्राइम पर नियंत्रण की जिम्मेदारी कैसे पूरी होगी? मोबाइल स्नैचिंग की घटनाएं जारी रहने के बीच पुलिस की गश्त, संदिग्धों की निगरानी और अपराध संभावित क्षेत्रों में तैनाती की प्रभावशीलता का आकलन करना भी जरूरी हो गया है।
जब ट्रैफिक पुलिस भी काट रही चालान, तो सीपीयू की अलग भूमिका क्या?
यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी यातायात पुलिस और परिवहन विभाग भी निभाते हैं। ऐसे में सीपीयू की तैनाती का औचित्य केवल चालान की संख्या से नहीं, बल्कि अपराध नियंत्रण, सड़क सुरक्षा और आमजन को उपलब्ध कराई जा रही सुरक्षा के आधार पर भी परखा जाना चाहिए।
यदि सीपीयू की टीमें दिन के समय चालान काटने में सक्रिय रहती हैं, तो रात के समय उनकी तैनाती और गश्त को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। खासकर उन इलाकों में, जहां मोबाइल स्नैचिंग और अन्य सड़क अपराधों की आशंका बनी रहती है, वहां पुलिस की नियमित मौजूदगी अपराधियों के मन में कानून का भय पैदा करने के लिए महत्वपूर्ण है।
सीपीयू के गठन और चालान की वैधता पर भी सवाल
सीपीयू के गठन से संबंधित शासनादेश और उसकी अधिकृत कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। यदि इस व्यवस्था के गठन और अधिकारों से संबंधित दस्तावेजों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो पुलिस के उच्चाधिकारियों को तथ्यों के आधार पर स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए। हालांकि, केवल शासनादेश को लेकर सवाल उठने से सीपीयू के चालान को अवैध नहीं माना जा सकता; इसके लिए संबंधित नियमों और कानूनी प्रावधानों की जांच आवश्यक है।
डीजीपी और पुलिस के आला अधिकारी दें जवाब
हरिद्वार में सीपीयू की भूमिका को लेकर उठ रहे सवालों के बीच पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे इसकी कार्यप्रणाली की समीक्षा करें। सीपीयू की दिन और रात की ड्यूटी, गश्त का रिकॉर्ड, स्ट्रीट क्राइम रोकने में भूमिका और चालान संबंधी कार्रवाई का आकलन किया जाना चाहिए।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब मोबाइल स्नैचिंग जैसी घटनाएं जारी हैं, तो सीपीयू की टीमें रात में कितनी सक्रिय हैं? क्या उनकी तैनाती अपराध नियंत्रण की जरूरतों के अनुरूप है या फिर व्यवस्था का मुख्य फोकस यातायात चालान तक सिमट गया है? इन सवालों पर पुलिस महकमे के आला अधिकारियों का जवाब और सीपीयू की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता जरूरी है, ताकि धर्मनगरी के नागरिकों और श्रद्धालुओं को सुरक्षित माहौल मिल सके।

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