डीएम साहब शहर में अंग्रेजी तो देहात में धड़ल्ले से बिक रही अवैध कच्ची शराब, आबकारी आयुक्त के फील्ड में उतरकर कार्रवाई करने के हैं निर्देश, कार्यालय से बाहर तक नहीं निकलते वीवीआईपी इंस्पेक्टर साहब

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खबर डोज, हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार में अवैध शराब के कारोबार पर अंकुश लगाने के सरकारी दावों के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शहर के कई इलाकों में जहां अवैध अंग्रेजी शराब खुलेआम बिक रही है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची शराब का कारोबार धड़ल्ले से संचालित होने की चर्चाएं हैं। ऐसे में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं।

जानकारों का कहना है कि आबकारी विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से नियमित रूप से फील्ड निरीक्षण और प्रभावी कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण अवैध शराब माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। आरोप है कि शहर और देहात के कई क्षेत्रों में लंबे समय से अवैध शराब का कारोबार फल-फूल रहा है, लेकिन विभाग की ओर से अपेक्षित स्तर पर कार्रवाई नहीं दिखाई दे रही है।

गौरतलब है कि आबकारी आयुक्त देहरादून की ओर से प्रदेशभर में अवैध शराब के कारोबार पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए गए थे। इसके लिए जिला स्तर के अधिकारियों को भी फील्ड में उतरकर अभियान चलाने और अवैध शराब के निर्माण व बिक्री पर प्रभावी कार्रवाई करने को कहा गया था। बावजूद इसके हरिद्वार में स्थिति में अपेक्षित सुधार नजर नहीं आ रहा है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं, लेकिन कार्रवाई के अभाव में यह कारोबार लगातार जारी है। यही कारण है कि विभाग की कार्यशैली को लेकर लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व में पथरी क्षेत्र में कथित रूप से जहरीली कच्ची शराब के सेवन से कई लोगों की मौत हो चुकी है। उस घटना के बाद भी अवैध शराब के कारोबार पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पाई। ऐसे में एक बार फिर यह सवाल उठ रहा है कि आखिरकार जिम्मेदार विभाग इस गंभीर समस्या पर कितनी प्रभावी निगरानी रख रहा है।

जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशन में जनपद के विभिन्न विभाग लगातार जनहित से जुड़े कार्यों और अभियानों को अंजाम दे रहे हैं, लेकिन आबकारी विभाग की निष्क्रियता को लेकर चर्चाएं तेज हैं। अब देखना होगा कि विभाग अवैध शराब के खिलाफ कितनी गंभीरता से कार्रवाई करता है और जिले को इस अवैध कारोबार से मुक्त कराने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

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