तीन माह से वेतन नहीं मिलने पर कर्मचारी ने महिला अस्पताल में आत्मदाह का किया प्रयास, मचा हड़कंप

सीएमएस के सामने खुद पर तेल डालकर आग लगाने की कोशिश, पुलिस ने कर्मचारी करण को हिरासत में लिया, पीपीपी मोड पर संचालित अस्पताल में वेतन को लेकर अन्य कर्मचारी और डॉक्टर भी परेशान
खबर डोज, हरिद्वार। हरिद्वार के महिला अस्पताल में मंगलवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब तीन माह से वेतन नहीं मिलने से परेशान एक कर्मचारी ने अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (सीएमएस) के सामने खुद पर तेल डालकर आग लगाने का प्रयास किया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने कर्मचारी करण को हिरासत में ले लिया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।
जानकारी के अनुसार, महिला अस्पताल में कार्यरत करण पिछले तीन माह से वेतन नहीं मिलने के कारण परेशान था। बताया जा रहा है कि इसी परेशानी के चलते उसने सीएमएस के सामने आत्मदाह का प्रयास किया। मौके पर मौजूद लोगों और अस्पताल प्रशासन के बीच घटना को लेकर हलचल मच गई। पुलिस ने कर्मचारी को हिरासत में लेकर मामले की जानकारी जुटाई।
पीपीपी मोड पर संचालित है महिला अस्पताल
गौरतलब है कि महिला अस्पताल को पीपीपी मोड पर संचालित किया जा रहा है। अस्पताल का संचालन निजी कंपनी एनपीपीएल (NPPL) के हाथों में है। आरोप है कि यहां कई कर्मचारी और डॉक्टर भी वेतन संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। तीन माह से वेतन नहीं मिलने की बात सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं और कर्मचारियों के भुगतान को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अस्पताल की व्यवस्थाओं पर भी उठ रहे सवाल
महिला अस्पताल में कर्मचारियों के वेतन को लेकर सामने आया यह मामला ऐसे समय में सामने आया है, जब अस्पताल की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। अस्पताल में अब तक पांच गर्भवती महिलाओं की मौत होने की बात भी सामने आई है। इन घटनाओं और अब कर्मचारी के आत्मदाह के प्रयास ने अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
निजी कंपनी के संचालन में चल रहे अस्पताल में कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलने की शिकायतें यदि सही हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक मामला है। इससे न केवल कर्मचारियों की आजीविका प्रभावित होती है, बल्कि अस्पताल के कामकाज पर भी असर पड़ने की आशंका रहती है।
जांच और जवाबदेही पर टिकी निगाहें
घटना के बाद अब यह सवाल उठ रहा है कि कर्मचारियों को तीन माह से वेतन क्यों नहीं दिया गया और इस मामले में अस्पताल संचालक कंपनी की क्या जिम्मेदारी है। साथ ही, अस्पताल में कार्यरत अन्य कर्मचारियों और डॉक्टरों की वेतन संबंधी समस्याओं के समाधान को लेकर भी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।
फिलहाल पुलिस ने कर्मचारी करण को हिरासत में लिया है। मामले में अस्पताल प्रशासन और निजी कंपनी की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है। आत्मदाह के प्रयास के पीछे वेतन संबंधी शिकायतों की वास्तविक स्थिति और अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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