नवरात्रि पर्व पर खाद्य सुरक्षा विभाग की छापेमारी, पनीर-सरसों तेल समेत कई खाद्य पदार्थों के नमूने लिए

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–ज्वालापुर में रेस्टोरेंट का खाद्य लाइसेंस नहीं मिला, भगवानपुर में 12 किलो खुला कुट्टू आटा मौके पर कराया नष्ट

खबर डोज, हरिद्वार। नवरात्रि पर्व और आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए हरिद्वार में खाद्य सुरक्षा विभाग ने मिलावटखोरी पर अंकुश लगाने के लिए सघन निरीक्षण एवं नमूना संग्रह अभियान चलाया। सोमवार, 12 अक्टूबर को विभाग की अलग-अलग टीमों ने ज्वालापुर और भगवानपुर क्षेत्र में खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण कर पनीर, सरसों के तेल, मूंगफली की गिरी, कुट्टू आटा, सिंघाड़ा आटा, वनस्पति घी और सेंधा नमक सहित विभिन्न खाद्य पदार्थों के नमूने जांच के लिए एकत्र किए।

खाद्य सुरक्षा आयुक्त, खाद्य संरक्षण, सरकार एवं औषधि प्रशासन उत्तराखंड विनय शंकर पाण्डेय तथा जिलाधिकारी मयूर दीक्षित के निर्देशों के अनुपालन में यह अभियान चलाया गया। सहायक आयुक्त खाद्य सुरक्षा महिमानन्द जोशी के नेतृत्व में विभागीय टीमों ने कार्रवाई की।

वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी नगर निगम क्षेत्र हरिद्वार कैलाश चन्द्र टम्टा ने ज्वालापुर के पुल जटवाड़ा क्षेत्र में पनीर की आपूर्ति करने वाले एक वाहन को रोककर पनीर का विधिक नमूना लिया। इसके बाद अनाज मंडी ज्वालापुर स्थित मौ. हुसैन ट्रेडर्स का निरीक्षण किया गया, जहां से सरसों के तेल का नमूना जांच के लिए लिया गया।

विभागीय टीम ने ऊंचा पुल स्थित मिष्टी अरोमा रेस्टोरेंट का भी निरीक्षण किया। यहां से मूंगफली की गिरी का नमूना संग्रहित किया गया। निरीक्षण के दौरान रेस्टोरेंट में खाद्य लाइसेंस उपलब्ध नहीं पाया गया। इस पर विभाग ने प्रतिष्ठान संचालक को नोटिस जारी किए।

भगवानपुर में 12 किलो कुट्टू आटा नष्ट कराया

वहीं, वरिष्ठ खाद्य सुरक्षा अधिकारी भगवानपुर पवन कुमार ने भगवानपुर मुख्य बाजार क्षेत्र में विभिन्न खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुट्टू आटा, सिंघाड़ा आटा, वनस्पति घी और सेंधा नमक सहित कुल पांच नमूने जांच के लिए एकत्र किए गए।

निरीक्षण के दौरान एक प्रतिष्ठान पर लगभग 12 किलोग्राम खुला कुट्टू आटा पाया गया, जिसे विभागीय टीम ने तत्काल मौके पर ही नष्ट करवा दिया।

खाद्य सुरक्षा विभाग के अनुसार, आगामी त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने और मिलावट की आशंका पर प्रभावी कार्रवाई के लिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा। लिए गए नमूनों को प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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