कोटद्वार गोविंदनगर के व्यापारी को किया डिजिटल अरेस्ट, 11 लाख की ठगी, नारकोटिक्स अधिकारी बनकर बनाया दबाव

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खबर डोज, कोटद्वार। साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कोटद्वार के एक व्यापारी से करीब 11 लाख रुपये की ठगी कर ली। ठगों ने व्यापारी को फोन कर खुद को नारकोटिक्स विभाग का अधिकारी बताया और दावा किया कि उसके नाम से भेजे गए एक पार्सल में ड्रग्स की खेप बरामद हुई है। इसके बाद व्यापारी को गिरफ्तारी और जेल भेजने का भय दिखाकर कई दिनों तक डिजिटल अरेस्ट के दबाव में रखा गया।

जानकारी के अनुसार, कोटद्वार नगर क्षेत्र के गोविंद नगर निवासी एक व्यापारी के पास कुछ दिन पहले फोन आया। फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को नारकोटिक्स अधिकारी बताया। उसने व्यापारी से कहा कि उसके नाम से एक पार्सल भेजा गया है, जिसमें नशीले पदार्थ बरामद हुए हैं। कथित अधिकारी ने मामले में व्यापारी के फंसने और जेल जाने का डर दिखाते हुए उसे लगातार दबाव में रखा।

ठगों ने मामले को रफा-दफा करने के नाम पर व्यापारी से रकम की मांग की। साइबर ठगों के दबाव और भय के चलते व्यापारी ने अलग-अलग किस्तों में ऑनलाइन करीब 11 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। रकम देने के बाद जब व्यापारी को पूरे मामले में ठगी होने का एहसास हुआ तो उसने पुलिस से शिकायत की।

कोतवाली प्रभारी निरीक्षक प्रदीप नेगी ने बताया कि व्यापारी की तहरीर के आधार पर अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है। साइबर ठगों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों के साथ ही ऑनलाइन लेनदेन से संबंधित विवरण की भी जांच की जा रही है। पुलिस का प्रयास है कि आरोपियों की पहचान कर उन्हें जल्द गिरफ्तार किया जाए।

कोटद्वार में डिजिटल अरेस्ट का दूसरा मामला

कोटद्वार में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का यह दूसरा बड़ा मामला सामने आया है। इससे पहले दिसंबर 2025 में पीजी कॉलेज कोटद्वार की एक वरिष्ठ प्राध्यापिका को भी साइबर ठगों ने डिजिटल अरेस्ट कर करीब 1.11 करोड़ रुपये की ठगी की थी। अब व्यापारी से 11 लाख रुपये की ठगी की घटना ने एक बार फिर साइबर अपराधियों के बढ़ते हौसलों और डिजिटल अरेस्ट के नाम पर की जा रही ठगी को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

पुलिस के अनुसार, साइबर ठग अक्सर पुलिस, नारकोटिक्स विभाग, सीबीआई या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं। पार्सल में ड्रग्स या अन्य अवैध सामग्री मिलने की बात कहकर उन्हें गिरफ्तारी का डर दिखाया जाता है। इसके बाद वीडियो कॉल पर निगरानी रखने अथवा डिजिटल अरेस्ट का झांसा देकर बैंक खातों से रकम ट्रांसफर करा ली जाती है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन पर डरकर रकम ट्रांसफर न करें। कोई भी सरकारी जांच एजेंसी फोन या वीडियो कॉल के जरिए इस तरह डिजिटल अरेस्ट कर पैसे जमा कराने के लिए दबाव नहीं बनाती। साइबर ठगी का संदेह होने पर तत्काल पुलिस या साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें।

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