सशक्त पंचायतें ही विकसित उत्तराखण्ड की मजबूत नींव: मुख्यमंत्री धामी

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-60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को एक साथ दिया गया क्षमता विकास प्रशिक्षण, मुख्यमंत्री ने कहा—‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना से करें काम

-जनभागीदारी से तैयार हों पंचायत विकास योजनाएं, गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता को दें प्राथमिकता

खबर डोज, हरिद्वार। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सशक्त पंचायतें ही विकसित उत्तराखण्ड की मजबूत नींव हैं। पंचायतें लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण और जमीनी इकाई हैं। गांव के विकास से ही प्रदेश के समग्र विकास का रास्ता निकलता है। पंचायत प्रतिनिधि ‘मेरा गांव-मेरी जिम्मेदारी’ की भावना के साथ कार्य करते हुए प्रत्येक पात्र व्यक्ति तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएं।

मुख्यमंत्री गुरुवार को हरिद्वार में त्रिस्तरीय पंचायत प्रतिनिधियों के क्षमता विकास के लिए आयोजित एक दिवसीय अभिमुखीकरण एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। प्रदेश के सभी विकासखंडों में एक साथ 60 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को क्षमता विकास प्रशिक्षण से जोड़ने को उन्होंने ग्राम स्तर पर विकास को नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम बताया।

सरकार और जनता के बीच सेतु हैं पंचायत प्रतिनिधि

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पंचायत प्रतिनिधि लोकतंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी होने के साथ सरकार और जनता के बीच सेतु का काम करते हैं। वे स्थानीय समस्याओं और ग्रामीणों की जरूरतों को सबसे बेहतर ढंग से समझते हैं। योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में उनकी भूमिका निर्णायक है।

उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से आह्वान किया कि वे अपने गांव की प्रत्येक समस्या को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए काम करें। सरकारी योजनाओं की जानकारी पात्र लोगों तक पहुंचाने के साथ यह भी सुनिश्चित करें कि योजनाओं का वास्तविक लाभ जरूरतमंद परिवारों को मिल रहा है।

जन योजना अभियान में स्थानीय जरूरतों को मिले प्राथमिकता

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पंचायतों को संसाधन, आधारभूत सुविधाएं और आधुनिक तकनीक उपलब्ध कराकर उन्हें विकास की नेतृत्वकर्ता संस्थाओं के रूप में सशक्त किया जा रहा है। राज्य सरकार भी इसी दिशा में लगातार कार्य कर रही है।

उन्होंने बताया कि 2 अक्टूबर 2026 से शुरू जन योजना अभियान के तहत ग्राम, क्षेत्र और जिला पंचायत स्तर पर विकास योजनाएं तैयार की जा रही हैं। इन योजनाओं में स्थानीय आवश्यकताओं, ग्रामीणों के सुझावों और उपलब्ध संसाधनों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि प्रत्येक पंचायत अपने विकास कार्यों के लिए स्पष्ट लक्ष्य, समयसीमा और अपेक्षित परिणाम तय करे, ताकि योजनाओं का लाभ केवल कागजों तक सीमित न रहे और विकास कार्यों का वास्तविक फायदा ग्रामीणों को मिल सके।

पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक पंचायत की विकास योजना में पेयजल, सड़क, स्वच्छता, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। ग्राम सभाओं में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाए और ग्रामीणों के सुझावों को योजनाओं में शामिल किया जाए।

उन्होंने विकास कार्यों की नियमित समीक्षा करने पर जोर देते हुए कहा कि पंचायत प्रतिनिधि यह भी देखें कि योजनाओं का लाभ किन परिवारों तक पहुंच रहा है। कमजोर, गरीब और वंचित वर्गों की जरूरतों को विशेष प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

56 हजार से अधिक प्रतिनिधियों को दिया गया प्रशिक्षण

मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025-26 में प्रदेश के 56 हजार से अधिक पंचायत प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण दिया गया है। राज्य की 7,817 ग्राम पंचायतों में से 5,972 में पंचायत भवन ग्राम सचिवालय के रूप में संचालित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में 1,362 पंचायत भवनों का निर्माण किया गया है, जबकि 584 पंचायत भवनों की मरम्मत कराई गई है। इसके अलावा एक हजार से अधिक ग्राम पंचायतों का कम्प्यूटरीकरण भी किया जा चुका है।

‘ई-ग्राम स्वराज’ से बढ़ रही पारदर्शिता

मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-ग्राम स्वराज पोर्टल के माध्यम से पंचायतों की कार्ययोजनाओं, वित्तीय एवं भौतिक प्रगति तथा विकास कार्यों की जियो टैगिंग की जा रही है। डिजिटल पंचायत की व्यवस्था का उद्देश्य पंचायतों के कामकाज को अधिक पारदर्शी, सरल और प्रभावी बनाना है।

उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों को स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि पंचायत का पैसा जनता का पैसा है और उसकी एक-एक पाई का हिसाब जनता के सामने होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास कार्यों की संख्या से ज्यादा उनका प्रभाव महत्वपूर्ण है। सड़कें बनना ही पर्याप्त नहीं, उनकी गुणवत्ता भी अच्छी होनी चाहिए। पेयजल योजनाएं केवल कागजों पर न रहें, बल्कि उनका वास्तविक उपयोग ग्रामीणों को मिले। पंचायत भवनों से ग्रामीणों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध हों, इस पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।

स्वच्छ और स्वस्थ गांव बनाने में पंचायतों की अहम भूमिका

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वच्छ और स्वस्थ गांव बनाने में पंचायतों की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए जिला पंचायतों को ग्रामीण मोटर मार्गों और स्थानीय बाजारों की सफाई के लिए कचरा उठाने वाली मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं।

विकासखंड स्तर पर भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए विशेष मशीनें स्थापित की गई हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से स्वच्छता अभियान को केवल सरकारी कार्यक्रम न मानकर जनभागीदारी का अभियान बनाने और गांवों में नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने का आह्वान किया।

महिला उद्यमिता और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमिता, कृषि, बागवानी, स्थानीय उत्पादों और पर्यटन को बढ़ावा दिया जा रहा है। गांवों में रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना तथा पलायन को कम करना सरकार की प्राथमिकता है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए सरकारी नौकरियों में 30 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण सहित कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। इसके साथ ही गांवों की सांस्कृतिक विरासत, परंपराओं और स्थानीय पहचान के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान देना जरूरी है।

गुणवत्ता और जवाबदेही सुनिश्चित करें पंचायत प्रतिनिधि

मुख्यमंत्री ने पंचायत प्रतिनिधियों से कहा कि प्रत्येक विकास कार्य में गुणवत्ता, समयबद्धता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान और जानकारी का उपयोग पंचायतों को स्वच्छ, समृद्ध और आत्मनिर्भर बनाने में किया जाना चाहिए।

उन्होंने विश्वास जताया कि पंचायत प्रतिनिधियों के समर्पित प्रयासों से ग्रामीण विकास को नई गति मिलेगी और विकसित उत्तराखण्ड के संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण योगदान मिलेगा।

पंचायतों के माध्यम से धरातल तक पहुंचती हैं योजनाएं: मदन कौशिक

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं को धरातल पर सफल बनाने में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। सड़क, बिजली, पंचायत भवन, विद्यालय सहित विकास की तमाम योजनाएं पंचायतों के माध्यम से ही आम लोगों तक पहुंचती हैं।

उन्होंने कहा कि पंचायतों में जनप्रतिनिधित्व और सक्रियता बढ़ने से गांवों में बड़ा बदलाव आएगा। पंचायत प्रतिनिधि यदि अपनी जिम्मेदारी का प्रभावी ढंग से निर्वहन करें तो ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति और तेज की जा सकती है।

मदन कौशिक ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के माध्यम से गांवों में विकास की नई संभावनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों से विकास योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने और उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का आह्वान किया।

बड़ी संख्या में पंचायत प्रतिनिधि और अधिकारी रहे मौजूद

कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, जिला पंचायत अध्यक्ष किरण चौधरी, रानीपुर विधायक आदेश चौहान, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, राज्य मंत्री देशराज कर्णवाल, राज्य मंत्री आदेश सैनी, ब्लॉक प्रमुख बहादराबाद आशा नेगी, जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, पुलिस अधीक्षक नवनीत सिंह भुल्लर, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) जितेंद्र कुमार, उप जिलाधिकारी हरिद्वार योगेश मेहरा, जिला पंचायत राज अधिकारी अतुल प्रताप सिंह सहित विभिन्न ग्राम पंचायतों से आए ग्राम प्रधान, पंचायत प्रतिनिधि और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

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