हरिद्वार जिले के वीआईपी थानेदार नहीं उठाते सरकारी फोन, प्राइवेट नंबर ढूंढकर करनी होती है कॉल, सवाल: कैसे थानेदार तक पहुंचेगी सूचना

खबर डोज, हरिद्वार। उत्तराखंड पुलिस की ओर से जनता की सुविधा और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित संपर्क के उद्देश्य से थानों से लेकर पुलिस कप्तान और डीजीपी स्तर तक सरकारी सीयूजी नंबर जारी किए गए थे। इन नंबरों की खास बात यह है कि अधिकारी बदलने के बाद भी नंबर वही रहते हैं, ताकि आम जनता को किसी भी समय पुलिस अधिकारियों तक पहुंचने में दिक्कत न हो। लेकिन जनपद हरिद्वार में स्थिति इसके ठीक उलट दिखाई दे रही है।
शहर से लेकर देहात क्षेत्रों तक कई थानों में तैनात थानेदार सरकारी नंबर उठाने तक को तैयार नहीं हैं। हालात ऐसे हैं कि किसी भी व्यक्ति को थाना प्रभारी से बात करनी हो तो पहले उनका निजी मोबाइल नंबर तलाश करना पड़ता है। सरकारी नंबरों पर कॉल करने पर या तो फोन रिसीव नहीं होता या फिर लंबे समय तक घंटी बजती रहती है। इससे आम जनता में नाराजगी बढ़ रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जब सरकार ने जनता की सुविधा के लिए सीयूजी नंबर जारी किए हैं तो उनका इस्तेमाल भी होना चाहिए। यदि किसी क्षेत्र में कोई बड़ी घटना, सड़क हादसा, चोरी, मारपीट या महिला सुरक्षा से जुड़ा मामला सामने आता है और उस समय थाना प्रभारी का सरकारी नंबर ही रिसीव न हो तो आखिर सूचना समय पर कैसे पहुंचेगी। कई लोगों का कहना है कि आपात स्थिति में नंबर ढूंढने में ही काफी समय निकल जाता है।
सूत्रों की मानें तो कुछ थानेदार केवल अपने जानने वालों या सीमित लोगों के ही फोन उठाते हैं, जबकि सरकारी नंबर औपचारिकता बनकर रह गए हैं। यही कारण है कि अब कई लोग सीधे निजी नंबरों पर संपर्क करने की कोशिश करते हैं। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब सरकारी नंबर जनता के लिए जारी किए गए हैं तो फिर उन्हें सक्रिय रखने की जिम्मेदारी कौन तय करेगा।
पुलिस विभाग समय-समय पर जनता और पुलिस के बीच बेहतर संवाद की बात करता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। यदि थानेदारों का यही रवैया जारी रहा तो किसी भी बड़ी अप्रिय घटना के दौरान लोग मदद मांगने के बजाय नंबर तलाशते रह जाएंगे। ऐसे में पुलिस मुख्यालय और वरिष्ठ अधिकारियों को इस गंभीर समस्या पर ध्यान देने की जरूरत है, ताकि जनता का भरोसा पुलिस व्यवस्था पर बना रहे।

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