हरिद्वार भूमि घोटाले में बड़ा एक्शन, DM समेत 12 अधिकारी सस्पेंड, विजिलेंस जांच के आदेश

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खबर डोज, हरिद्वार। हरिद्वार नगर निगम की जमीन खरीद में सामने आए करोड़ों रुपये के कथित घोटाले पर मुख्यमंत्री ने बड़ा और सख्त कदम उठाया है। मामले में अब तक दो आईएएस, एक पीसीएस अधिकारी समेत कुल 12 अधिकारियों को निलंबित किया जा चुका है। साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच विजिलेंस को सौंप दी गई है।

मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा सराय गांव में कूड़ाघर के समीप स्थित 2.3070 हेक्टेयर भूमि की खरीद से जुड़ा है। आरोप है कि अनुपयुक्त मानी जाने वाली इस भूमि को करोड़ों रुपये खर्च कर खरीदा गया, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के सवाल खड़े हुए। शिकायतों के बाद मुख्यमंत्री धामी ने मामले की जांच के आदेश दिए थे।

जांच की जिम्मेदारी आईएएस अधिकारी को सौंपी गई थी। उनकी रिपोर्ट में कई स्तरों पर गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने दोषी अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद कार्मिक एवं सतर्कता विभाग ने आरोपित अधिकारियों को निलंबित करने के आदेश जारी कर दिए।

इन अधिकारियों पर गिरी गाज

निलंबित किए गए अधिकारियों में हरिद्वार के तत्कालीन प्रशासक एवं जिलाधिकारी , तत्कालीन नगर आयुक्त , तत्कालीन एसडीएम , वरिष्ठ वित्त अधिकारी निकिता बिष्ट, वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक विक्की, रजिस्ट्रार कानूनगो राजेश कुमार और मुख्य प्रशासनिक अधिकारी कमलदास समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं।

सरकार ने कर्मेंद्र सिंह, वरुण चौधरी और अजयवीर सिंह को उनके वर्तमान पदों से हटाकर शासन के कार्मिक एवं सतर्कता विभाग से संबद्ध कर दिया है।

अधिकारियों पर क्या हैं आरोप

जांच रिपोर्ट के अनुसार तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह की भूमिका जमीन खरीद की अनुमति देने में संदिग्ध पाई गई है। उन पर नियमों की अनदेखी और निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरतने के आरोप हैं।

तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी पर बिना निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए भूमि खरीद प्रस्ताव को आगे बढ़ाने और वित्तीय अनियमितताओं में प्रमुख भूमिका निभाने का आरोप लगा है।

वहीं तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह पर आरोप है कि उन्होंने भूमि खरीद प्रक्रिया के दौरान ही संबंधित जमीन का लैंड यूज बदल दिया, जिससे जमीन की कीमत तीन गुना से अधिक बढ़ गई और नगर निगम को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।

विजिलेंस करेगी गहराई से जांच

सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अब इसकी जांच विजिलेंस को सौंप दी है। माना जा रहा है कि जांच के दौरान जमीन खरीद प्रक्रिया, मूल्य निर्धारण, लैंड यूज परिवर्तन और अधिकारियों की भूमिका से जुड़े कई अन्य पहलुओं की भी पड़ताल की जाएगी।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ संकेत दिए हैं कि भ्रष्टाचार और सरकारी धन के दुरुपयोग के मामलों में किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हरिद्वार भूमि घोटाले में हुई यह कार्रवाई राज्य प्रशासनिक तंत्र में अब तक की सबसे बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाइयों में से एक मानी जा रही है।

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