उलझन: सिडकुल थाना है या कोतवाली? बोर्ड पर अंदर थाना तो बाहर लिखा है कोतवाली, पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

खबर डोज, हरिद्वार। जनपद हरिद्वार का सिडकुल थाना अक्सर किसी न किसी कारण से चर्चा में बना रहता है, लेकिन इस बार वजह कानून व्यवस्था या किसी बड़ी कार्रवाई नहीं, बल्कि विभागीय लापरवाही है। सिडकुल पुलिस परिसर में लगे अलग-अलग बोर्ड लोगों के लिए भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं। थाने के मुख्य प्रवेश द्वार पर जहां “कोतवाली सिडकुल” लिखा हुआ है, वहीं परिसर के भीतर आज भी “थाना सिडकुल” का बोर्ड लगा हुआ दिखाई देता है।
इस विरोधाभास ने आम लोगों के साथ-साथ पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब पुलिस विभाग स्वयं अपने थानों की सही पहचान स्पष्ट नहीं कर पा रहा है तो इससे प्रशासनिक गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है।
गौरतलब है कि हरिद्वार जनपद के अधिकांश थानों को पूर्व में कोतवाली के रूप में उच्चीकृत किया जा चुका है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार जनपद के 17 थानों में से बुग्गावाला को छोड़कर लगभग सभी थानों को कोतवाली का दर्जा मिल चुका है। इसके बावजूद सिडकुल में आज तक पुराने और नए बोर्ड एक साथ लगे हुए हैं, जिससे स्थिति और अधिक भ्रमित हो रही है।
दिलचस्प बात यह है कि सिडकुल कोतवाली में समय-समय पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की बैठकें, प्रेस कॉन्फ्रेंस और निरीक्षण कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं। जिले के पुलिस कप्तान सहित कई उच्चाधिकारी यहां पहुंचते रहे हैं, लेकिन किसी का भी ध्यान इस विसंगति की ओर नहीं गया। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर विभागीय स्तर पर इस तरह की स्पष्ट त्रुटि को अब तक क्यों नहीं सुधारा गया।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पुलिस विभाग को जल्द ही स्थिति स्पष्ट करते हुए सभी बोर्डों को एकरूप करना चाहिए, ताकि जनता के बीच किसी प्रकार का भ्रम न रहे। फिलहाल सिडकुल में यह सवाल चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर यह थाना है या कोतवाली?।

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