हरिद्वार में सीबीआई जांच का डर दिखाकर आश्रम की संपत्ति हड़पने की साजिश, करोड़ों के खेल का खुलासा

खबर डोज, हरिद्वार। भूपतवाला क्षेत्र से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां सीबीआई जांच का भय दिखाकर आश्रम की संपत्ति पर कब्जा जमाने और महंत से लाखों रुपये ठगने का आरोप लगा है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, मोक्षधाम सत्संग भजनानंद हरि ट्रस्ट, मुखिया गली भूपतवाला के महंत गोपाल हरि ने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया कि उनके पड़ोसी हरीश बंसल ने आश्रम के संचालन को बेहतर बनाने का भरोसा दिलाकर उन्हें ट्रस्ट बनाने के लिए राजी किया। इसके बाद उसने अपने परिचित सुनील कुमार निवासी नजफगढ़ (दिल्ली) और सुमित कालिया निवासी रोहतक (हरियाणा) को ट्रस्टी के रूप में शामिल करा दिया।
आरोप है कि ट्रस्ट का नियंत्रण अपने हाथ में लेते ही आरोपितों ने बैंकिंग कार्यों के नाम पर महंत से कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों और कोरे चेक पर हस्ताक्षर करवा लिए। अप्रैल 2025 में आरोपितों ने अंग्रेजी में तैयार एक पत्र दिखाकर उसे सीबीआई का नोटिस बताया और जांच का डर दिखाकर मोटी रकम की मांग शुरू कर दी। जांच खर्च और अन्य मदों के नाम पर लगातार पैसे वसूले जाते रहे।
महंत के अनुसार, 21 नवंबर 2025 को आरोपित एक व्यक्ति को आश्रम की संपत्ति दिखाने लेकर आए और 70 लाख रुपये में सौदा तय करने की बात कही। इसके बाद 10 दिसंबर को रजिस्ट्री कराने के लिए दबाव बनाया गया। जब महंत ने आपत्ति जताई तो सौदा रद्द कराने के नाम पर भी पैसे मांगे गए। दबाव बनाकर तीन लाख रुपये नकद और केनरा बैंक भूपतवाला शाखा के पांच कोरे चेक पर हस्ताक्षर करा लिए गए।
मामले का खुलासा तब हुआ जब महंत ने निर्मल अखाड़ा से जानकारी ली। वहां से पता चला कि कोई भी सीबीआई नोटिस जारी नहीं किया गया था। इसके बाद जब महंत ने आरोपितों से अपनी रकम वापस मांगी, तो उन्हें जान से मारने की धमकी दी गई और व्हाट्सएप के जरिए ब्लैकमेल किया जाने लगा। पीड़ित का आरोप है कि अब भी उनसे 20 लाख रुपये की मांग की जा रही है।
कोतवाली प्रभारी कुंदन सिंह राणा ने बताया कि शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है और जल्द ही आरोपितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
इस घटना ने क्षेत्र में हड़कंप मचा दिया है और धार्मिक संस्थानों की सुरक्षा व पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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