हरिद्वार में एसडीएम सदर पर 10 हजार रुपये का जुर्माना, सूचना आयोग ने माना आरटीआई नियमों की अवहेलना

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खबर डोज, हरिद्वार। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी समय पर उपलब्ध नहीं कराने और सूचना आयोग के आदेशों की अनदेखी करने पर उत्तराखंड सूचना आयोग ने हरिद्वार के तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं उप जिलाधिकारी (सदर) पर 10 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। आयोग ने इसे आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों का गंभीर उल्लंघन माना है।

मामला हरिद्वार-हिल बाईपास मार्ग स्थित हनुमान मंदिर के दोनों ओर कथित रूप से सरकारी भूमि पर हुए अतिक्रमण से जुड़ा है। सामाजिक कार्यकर्ता अजीत सिंह चौहान, निवासी हरिलोक कॉलोनी ज्वालापुर, ने 10 मार्च 2024 को तहसीलदार कार्यालय हरिद्वार से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत संबंधित जानकारी मांगी थी। निर्धारित समयावधि में सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई, जिसके बाद उन्होंने प्रथम अपील दायर की, लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें जानकारी प्राप्त नहीं हुई।

सूचना नहीं मिलने पर मामला उत्तराखंड सूचना आयोग पहुंचा। सुनवाई के दौरान सूचना आयुक्त दलीप सिंह कुंवर ने संबंधित अधिकारियों को कई बार नोटिस जारी किए और मांगी गई सूचना उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। आयोग ने पाया कि लोक सूचना अधिकारी स्तर पर सूचना उपलब्ध कराने में लापरवाही बरती गई तथा आयोग के निर्देशों का भी पालन नहीं किया गया।

आयोग ने सुनवाई के बाद तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी एवं उप जिलाधिकारी (सदर) जितेंद्र कुमार को आदेशों की अवहेलना का दोषी मानते हुए उन पर 10 हजार रुपये का आर्थिक दंड लगाया। आयोग ने अपने आदेश में कहा कि आरटीआई अधिनियम का उद्देश्य शासन-प्रशासन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना है तथा सूचना उपलब्ध कराने में अनावश्यक देरी या आदेशों की अनदेखी स्वीकार्य नहीं है।

सूचना आयोग की इस कार्रवाई को प्रशासनिक जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में दंडात्मक कार्रवाई से लोक सूचना अधिकारियों के बीच जवाबदेही बढ़ेगी और आरटीआई अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करने में मदद मिलेगी।

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