हरिद्वार में सीपीयू का रिकॉर्ड कहां? अपराधियों को पकड़ने में जीरो, चालान काटने में हीरो! सवाल: रात में कहां गायब हो जाती है सीपीयू

–सीपीयू के अलग डेटा की जानकारी नहीं, चालानों की गिनती ट्रैफिक पुलिस के साथ
खबर डोज, हरिद्वार। हरिद्वार में सिटी पेट्रोल यूनिट (सीपीयू) की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। सड़कों पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के चालान काटने में सीपीयू की सक्रियता दिखाई देती है, लेकिन स्ट्रीट क्राइम, चेन स्नैचिंग और अन्य आपराधिक घटनाओं की रोकथाम में इसकी भूमिका कितनी प्रभावी है, यह जांच का विषय है। सवाल यह भी है कि जिस यूनिट का उद्देश्य अपराध नियंत्रण और प्रभावी पुलिसिंग बताया गया था, उसकी उपलब्धियों का आकलन किस आधार पर किया जा रहा है?
ट्रैफिक पुलिस की मुखिया के मुताबिक उनके कार्यालय में सीपीयू के चालानों का अलग से कोई डेटा उपलब्ध नहीं है और इन चालानों की गिनती ट्रैफिक पुलिस के साथ की जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि सीपीयू के कामकाज का स्वतंत्र रिकॉर्ड, अपराध नियंत्रण में उसका योगदान और उसके प्रदर्शन का मूल्यांकन करने की व्यवस्था आखिर कहां है?
चालान की गिनती है, तो अपराध नियंत्रण का हिसाब कहां?
सीपीयू की कार्यप्रणाली को लेकर सबसे अहम सवाल उसके मूल उद्देश्य से जुड़ा है। यदि यूनिट की उपलब्धियों का प्रमुख आधार चालान की संख्या है, तो यह भी सार्वजनिक होना चाहिए कि उसके जवानों ने कितनी आपराधिक घटनाओं को रोकने में भूमिका निभाई, कितने संदिग्धों को पकड़ा और रात्रि गश्त के दौरान कितनी प्रभावी कार्रवाई की।
चालान काटना यातायात व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन पुलिसिंग की सफलता का आकलन केवल चालानों की संख्या से नहीं किया जा सकता। अपराध की रोकथाम, संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी और आम नागरिकों की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं।
रात के अंधेरे में कहां रहती है सीपीयू?
हरिद्वार जैसे धार्मिक और पर्यटन महत्व वाले शहर में दिन के साथ रात के समय भी पुलिस की सक्रियता जरूरी है। शहर में चोरी, चेन स्नैचिंग, मोबाइल स्नैचिंग समेत अन्य सड़क अपराधों की रोकथाम के लिए नियमित गश्त और संदिग्धों पर निगरानी अहम भूमिका निभाती है।
ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि रात के समय सीपीयू की तैनाती किन क्षेत्रों में रहती है? रात्रि गश्त का रूट क्या है? गश्त की निगरानी किस अधिकारी के स्तर से होती है और रात के दौरान की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड कहां दर्ज किया जाता है? इन सवालों के जवाब सामने आने से ही सीपीयू की वास्तविक कार्यप्रणाली का आकलन हो सकेगा।
हालांकि, रात में सीपीयू की अनुपस्थिति या अपराधियों को पकड़ने में उसकी विफलता को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले तैनाती, गश्त और कार्रवाई से जुड़े आधिकारिक आंकड़ों की जांच जरूरी है।
1 अप्रैल 2014 को हुआ था सीपीयू का गठन
सीपीयू यानी सिटी पेट्रोल यूनिट का गठन उत्तराखंड में 1 अप्रैल 2014 को किया गया था। उत्तराखंड पुलिस ने इसकी शुरुआत देहरादून में 60 पुलिसकर्मियों के साथ की थी। इसका उद्देश्य स्ट्रीट क्राइम की रोकथाम, आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई, यातायात प्रबंधन और कानून का प्रभावी पालन सुनिश्चित करना था। बाद में इसका विस्तार हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल में किया गया।
किस अधिकारी के आदेश पर हुआ गठन?
सीपीयू का गठन तत्कालीन पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू के कार्यकाल में पुलिस महानिदेशक कार्यालय के स्तर पर किया गया था। वर्ष 2021 में प्रकाशित एक रिपोर्ट में आरटीआई के जवाब का हवाला देते हुए बताया गया था कि सीपीयू का गठन डीजीपी कार्यालय द्वारा किया गया था।
क्या सीपीयू का शासनादेश उपलब्ध है?
सीपीयू के गठन को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। वर्ष 2021 में प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आरटीआई से मिली जानकारी में सीपीयू के गठन से संबंधित शासनादेश जारी होने की पुष्टि नहीं हुई थी। हालांकि, इस रिपोर्ट के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि सीपीयू की प्रत्येक कार्रवाई अवैध है। इसके लिए मूल आरटीआई जवाब, विभागीय आदेश और लागू कानूनी प्रावधानों की जांच आवश्यक है।
अब सवाल यह है कि क्या उत्तराखंड पुलिस मुख्यालय के पास सीपीयू के गठन का मूल आदेश, इसके अधिकारों का विवरण, बजट और कार्यप्रणाली से संबंधित दस्तावेज उपलब्ध हैं? यदि आदेश पुलिस मुख्यालय स्तर से जारी किया गया था, तो उसकी प्रमाणित प्रति सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि यूनिट की स्थापना और उसके अधिकारों को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
उत्तराखंड के किन शहरों में तैनात है सीपीयू?
वर्ष 2021 की एक मीडिया रिपोर्ट में यातायात निदेशालय के हवाले से छह शहरों में सीपीयू की तैनाती का उल्लेख किया गया था। इनमें देहरादून, हरिद्वार, रुड़की, काशीपुर, रुद्रपुर और हल्द्वानी शामिल थे। यह उस समय की जानकारी है; वर्तमान तैनाती और स्वीकृत पदों की पुष्टि यातायात निदेशालय से की जानी चाहिए।
पारदर्शिता के लिए सार्वजनिक हो आंकड़े
हरिद्वार में सीपीयू की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि आधिकारिक आंकड़ों से मिलना चाहिए। यातायात निदेशालय और पुलिस मुख्यालय को सीपीयू के चालानों, अपराध नियंत्रण संबंधी कार्रवाइयों, रात्रि गश्त, गिरफ्तारियों और उपलब्ध संसाधनों का विवरण सामने लाना चाहिए।
यदि सीपीयू के चालानों की गिनती ट्रैफिक पुलिस के साथ होती है, तो यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि दोनों इकाइयों के प्रदर्शन का अलग-अलग मूल्यांकन कैसे किया जाता है। आखिरकार, जनता को यह जानने का अधिकार है कि अपराध नियंत्रण के उद्देश्य से गठित इस यूनिट का वास्तविक प्रदर्शन क्या है और उसके कामकाज की जवाबदेही किस अधिकारी के पास है।

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