ऑटो में भर दी ओवरलोड सवारी, पलट गया तो होगी किसकी जिम्मेदारी?, वीडियो हुआ वायरल

खबर डोज, हरिद्वार। जनपद में ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई लगभग शून्य होती नजर आ रही है। धार्मिक नगरी के सबसे व्यस्त और संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हर की पैड़ी क्षेत्र में सवारियों से खचाखच भरा एक ऑटो इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। यह दृश्य न सिर्फ परिवहन विभाग के दावों की पोल खोलता है, बल्कि सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करता है।
स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के अनुसार, हर की पैड़ी और आसपास के इलाकों में ऑटो चालकों द्वारा निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक सवारियां बैठाना आम बात हो गई है। नियमों के अनुसार एक ऑटो में सीमित संख्या में ही यात्रियों को बैठाने की अनुमति होती है, लेकिन हकीकत में चालक अधिक कमाई के लालच में सुरक्षा मानकों को ताक पर रख रहे हैं। कई बार तो ऑटो के अंदर ही नहीं, बल्कि पीछे लटककर भी लोग सफर करते नजर आते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की ओवरलोडिंग न सिर्फ यात्रियों की जान को जोखिम में डालती है, बल्कि सड़क पर अन्य वाहनों के लिए भी खतरा बनती है। अगर ऐसा कोई ऑटो संतुलन खोकर पलट जाए, तो गंभीर हादसा हो सकता है, जिसमें कई लोगों की जान जा सकती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि आखिर इसकी जिम्मेदारी किसकी होगी—चालक की, परिवहन विभाग की या फिर प्रशासन की?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि परिवहन विभाग और ट्रैफिक पुलिस की ओर से इस दिशा में कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। कभी-कभार औपचारिक चालान काटने की कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन वह भी खानापूर्ति तक ही सीमित रह जाती है। नतीजा यह है कि नियमों का खुलेआम उल्लंघन जारी है और किसी को इसका डर नहीं है।
वहीं, परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर अभियान चलाकर ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों से मेल नहीं खाती। व्यस्त क्षेत्रों में लगातार हो रही लापरवाही यह दर्शाती है कि निगरानी व्यवस्था कमजोर है और जिम्मेदार अधिकारी इस पर गंभीरता से ध्यान नहीं दे रहे हैं।
सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस समस्या के समाधान के लिए नियमित चेकिंग अभियान, सख्त जुर्माना और लाइसेंस निलंबन जैसी कड़ी कार्रवाई जरूरी है। साथ ही, आम लोगों को भी जागरूक होना होगा और ओवरलोड वाहनों में यात्रा करने से बचना चाहिए।
धार्मिक नगरी हरिद्वार में रोजाना हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा व्यवस्था में किसी भी तरह की लापरवाही बड़े हादसे का कारण बन सकती है। अगर समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया, तो कोई बड़ी दुर्घटना होने के बाद ही प्रशासन की नींद खुलेगी—और तब तक बहुत देर हो चुकी होगी।

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