विभाग का नाम लिखकर खुले नाले में छोड़ा जा रहा था अपशिष्ट जल, जल संस्थान ने अज्ञात के खिलाफ दर्ज कराई एफआईआर, देखिए वीडियो

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जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने लिया तत्काल संज्ञान, दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश

खबर डोज, हरिद्वार। हरिद्वार में गंगा और पर्यावरण संरक्षण को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह सख्त नजर आ रहा है। जिला गंगा संरक्षण समिति की बैठक के दौरान एक गंभीर मामला सामने आया, जिसमें उत्तराखंड जल संस्थान का नाम लिखी एक ट्रैक्टर सक्शन मशीन द्वारा अपशिष्ट जल को खुले नाले में प्रवाहित करते हुए दिखाई गई वीडियो क्लिप प्रस्तुत की गई। मामले का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

बैठक में दिखाई गई वीडियो क्लिप में भूपतवाला क्षेत्र में एक ट्रैक्टर सक्शन मशीन से सीवर का अपशिष्ट जल खुले नाले में छोड़ा जाता हुआ दिखाई दे रहा था। वीडियो सामने आते ही जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित वीडियो अधिशासी अभियंता जल संस्थान को भेजकर पूरे मामले की जांच कराने के निर्देश दिए।

जांच के दौरान अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने वीडियो का अवलोकन किया, जिसमें ट्रैक्टर पर “उत्तराखंड जल संस्थान” अंकित पाया गया। हालांकि विभागीय जांच में स्पष्ट हुआ कि जल संस्थान के पास इस प्रकार की कोई ट्रैक्टर सक्शन मशीन उपलब्ध ही नहीं है। इससे यह आशंका जताई गई कि किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा विभाग के नाम का दुरुपयोग करते हुए अवैध रूप से अपशिष्ट जल का निस्तारण किया जा रहा था।

अधिशासी अभियंता ने इस संबंध में जिलाधिकारी को पूरी जानकारी उपलब्ध कराई। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने संबंधित अज्ञात व्यक्ति अथवा ट्रैक्टर संचालक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर कठोर कार्रवाई करने के निर्देश दिए।

इसके बाद अधिशासी अभियंता अजय कुमार ने अपर सहायक अभियंता को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए। निर्देशों के अनुपालन में अपर सहायक अभियंता द्वारा अज्ञात ट्रैक्टर सक्शन मशीन संचालक एवं संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नगर कोतवाली हरिद्वार में प्राथमिकी दर्ज करा दी गई है।

प्रशासन का कहना है कि गंगा एवं पर्यावरण को प्रदूषित करने वाले तत्वों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही विभाग के नाम का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ भी सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। मामले की जांच पुलिस द्वारा की जा रही है और वीडियो के आधार पर संबंधित वाहन व संचालक की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।

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