हरिद्वार में डीएम साहब का जनता दरबार: फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, जमीनी हकीकत पर सवाल, राशन कार्ड के लिए छह माह से भटक रही दिव्यांग महिला, देखिए वीडियो

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–डीएम मयूर दीक्षित की मेहनत के बावजूद कुछ विभागीय अफसरों की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल, सीडीओ ने महिला का कार्य प्राथमिकता से कराने के दिए निर्देश

खबर डोज, हरिद्वार। प्रसिद्ध कवि अदम गोंडवी की पंक्ति “फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है” आज भी ग्रामीण विकास की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े करती नजर आती है। सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों को धरातल तक पहुंचाने के लिए अधिकारी लगातार प्रयास कर रहे हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या कुछ विभागीय अधिकारी इन प्रयासों को उतनी ही गंभीरता से ले रहे हैं, जितनी अपेक्षा की जाती है।

हरिद्वार जिले में जिलाधिकारी मयूर दीक्षित की कार्यशैली को लेकर आमतौर पर यह माना जाता है कि वह विकास कार्यों और जनसमस्याओं को लेकर गंभीरता से काम कर रहे हैं। अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से समस्याओं के समाधान और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए जाते हैं। इसके बावजूद यदि किसी मामले में संबंधित विभागीय स्तर पर कार्रवाई में देरी होती है, तो इससे प्रशासन की मंशा और जमीनी अमल के बीच अंतर दिखाई देने लगता है।

इसी तरह के एक मामले में एक महिला से जुड़े कार्य को लेकर भी सवाल खड़े हुए हैं। मामले की जानकारी सामने आने के बाद मुख्य विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को महिला के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए हैं। सीडीओ के निर्देश के बाद अब संबंधित विभाग की कार्यशैली और कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।

ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे में यदि किसी पात्र व्यक्ति का कार्य लंबे समय तक लंबित रहता है तो उसे शासन-प्रशासन की योजनाओं का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाता। यही वजह है कि जिला प्रशासन की ओर से बार-बार अधिकारियों को जनसमस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने के निर्देश दिए जाते हैं।

अब देखना होगा कि सीडीओ के निर्देश के बाद संबंधित विभाग इस मामले में कितनी तेजी से कार्रवाई करता है और महिला को उसका हक कब तक मिल पाता है। साथ ही यह भी सवाल बना हुआ है कि जब जिलाधिकारी स्तर से विकास और जनहित के कार्यों को लेकर लगातार गंभीरता दिखाई जा रही है, तो क्या निचले स्तर पर बैठे कुछ अधिकारी इन निर्देशों को उसी गंभीरता से लागू कर रहे हैं या नहीं।

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