नाबालिग साबित होने के लिए आठवीं की बना डाली फर्जी टीसी, जांच के बाद सिडकुल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ किया मुकदमा दर्ज

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खबर डोज, हरिद्वार। सिडकुल थाना क्षेत्र में एक आरोपी द्वारा खुद को नाबालिग साबित करने के लिए कथित तौर पर आठवीं कक्षा की फर्जी स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) तैयार कर उसे मुकदमे की विवेचना में असली दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल करने का मामला सामने आया है। पुलिस ने मामले में आरोपी के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

पुलिस की ओर से जारी सूचना के मुताबिक सिडकुल थाने में दर्ज मुकदमे में आरोपी विशाल पुत्र नरेश, निवासी ग्राम सीतापुर, थाना भोपा, जिला मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश का नाम सामने आया है। आरोपी के खिलाफ पहले से धारा 137(2), 64(2)(M) बीएनएस तथा 5(L)/6 पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज बताया गया है।


पुलिस के अनुसार उक्त मुकदमे की विवेचना के दौरान आरोपी विशाल की ओर से स्वयं को नाबालिग दर्शाने का प्रयास किया गया। आरोप है कि इसके लिए आरोपी ने कक्षा आठवीं की टीसी में कूटरचना की और कथित रूप से तैयार की गई फर्जी टीसी को विवेचना के दौरान असली दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल किया।


मामला सामने आने के बाद पुलिस ने दस्तावेज की जांच शुरू की। जांच के आधार पर आरोपी के खिलाफ कूटरचना और कूटरचित दस्तावेज को वास्तविक के रूप में इस्तेमाल करने के आरोप में कार्रवाई की गई है।


सिडकुल थानाध्यक्ष अजय शाह के मुताबिक, मामले की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि कथित फर्जी टीसी किस तरह तैयार की गई और इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका तो नहीं है। दस्तावेज से संबंधित तथ्यों और उसकी वास्तविकता की भी जांच की जा रही है।
बताया कि जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। मामले के सामने आने के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि मुकदमे में उम्र को लेकर स्थिति स्पष्ट करने के लिए प्रस्तुत किए गए दस्तावेजों की सत्यता की जांच कितनी महत्वपूर्ण है।

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