हरकी पैडी पर पत्रकार ने दिखाई बहादुरी, गंगा में डूब रहे युवक की बचाई जान, देखिए वीडियो

खबर डोज, हरिद्वार। धर्मनगरी हरिद्वार की हर की पौड़ी पर शनिवार शाम एक बड़ा हादसा उस समय टल गया, जब गंगा के तेज बहाव में बह रहे एक युवक को पत्रकार हरि गौतम ने अपनी जान जोखिम में डालकर बचा लिया। उनकी सूझबूझ और साहस के चलते युवक को नया जीवन मिल गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार शनिवार शाम करीब 4:45 बजे खड़खड़ी निवासी 28 से 30 वर्षीय अजय नामक युवक हर की पौड़ी क्षेत्र में गंगा स्नान के दौरान अचानक असंतुलित होकर तेज बहाव में बहने लगा। युवक धीरे-धीरे गहरे पानी की ओर जा रहा था और डूबने की स्थिति में पहुंच चुका था।
इसी दौरान हरि गौतम भी गंगा स्नान के लिए हर की पौड़ी पहुंचे हुए थे। उन्होंने युवक को बहते हुए देखा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार काफी दूरी तक बहने के बावजूद युवक की मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हरि गौतम तुरंत गंगा में कूद पड़े और तेज बहाव के बीच तैरकर युवक तक पहुंचे।
बताया जा रहा है कि हरि गौतम ने अपनी जान की परवाह किए बिना युवक को संभाला और धक्का देकर धीरे-धीरे किनारे की ओर लाते हुए सुरक्षित बाहर निकाल लिया। यदि कुछ और देर हो जाती तो युवक के डूबने की आशंका थी।
श्रद्धालुओं ने की सराहना
घटना के बाद मौके पर मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों ने हरि गौतम के साहसिक कार्य की जमकर सराहना की। लोगों का कहना था कि यदि समय रहते उन्होंने साहस नहीं दिखाया होता तो युवक की जान बचाना मुश्किल हो सकता था। बताया जा रहा है कि पूरी घटना हर की पौड़ी पर लगे सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हुई है।
15 दिन पहले भी बचाई थी एक युवक की जान
जानकारी के अनुसार यह पहला मौका नहीं है जब हरि गौतम ने किसी की जान बचाई हो। करीब 15 दिन पहले भी उन्होंने हरियाणा के एक युवक को गंगा में डूबने से बचाकर सुरक्षित बाहर निकाला था।
बच्चों को तैरना सिखाने की अपील
इस घटना के बाद हरि गौतम ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा कि बच्चों को शिक्षा के साथ-साथ तैराकी भी अवश्य सिखानी चाहिए। उनका कहना है कि तैरना सीखने से व्यक्ति न केवल अपनी जान बचा सकता है बल्कि संकट की घड़ी में दूसरों की भी मदद कर सकता है। उन्होंने लोगों को गहरे पानी में बिना तैराकी जाने उतरने से बचने की सलाह दी।
हर की पौड़ी पर गोताखोर तैनात करने की मांग
हरि गौतम ने चिंता जताते हुए कहा कि चारधाम यात्रा और आगामी कांवड़ मेले जैसे बड़े आयोजनों के बावजूद हर की पौड़ी पर हर समय प्रशिक्षित गोताखोर तैनात नहीं हैं। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि यात्रा और कांवड़ सीजन के दौरान हर की पौड़ी पर 24 घंटे गोताखोरों की तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल राहत और बचाव कार्य किया जा सके।
धर्मनगरी में हुई इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि साहस, मानवता और त्वरित निर्णय किसी की जिंदगी बचाने में कितना महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

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