हरिद्वार में खाकी की दबंगई पर सवाल: घर में घुसने से लेकर चौकी में पिटाई तक, दो सिपाहियों पर गंभीर आरोप

सीएम हेल्पलाइन तक पहुंची शिकायत, महिला ने बेटे को चौकी ले जाकर पीटने और 20 हजार रुपये लेकर छोड़ने का लगाया आरोप
खबर डोज, हरिद्वार। कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाली पुलिस पर ही सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। औद्योगिक क्षेत्र की एक कोतवाली की चौकी में लंबे समय से तैनात बताए जा रहे दो सिपाहियों के खिलाफ एक महिला ने गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत की है। महिला का आरोप है कि दोनों सिपाहियों ने उसके परिवार को परेशान किया, घर में घुसकर अभद्रता की और करीब 15 दिन पहले उसके बेटे को घर से चौकी ले जाकर कथित तौर पर मारपीट की। महिला ने यह भी आरोप लगाया है कि युवक को छोड़ने के एवज में उससे 20 हजार रुपये लिए गए।
मामले की शिकायत अब सीएम हेल्पलाइन तक पहुंच गई है। शिकायतकर्ता ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही चौकी में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच कराने की मांग की है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
बेटे को चौकी ले जाकर पीटने का आरोप
महिला के मुताबिक करीब 15 दिन पहले दोनों सिपाही उसके घर पहुंचे और उसके बेटे को अपने साथ चौकी ले गए। आरोप है कि युवक को चौकी में कथित रूप से पीटा गया। महिला का दावा है कि बाद में 20 हजार रुपये लिए जाने के बाद युवक को छोड़ दिया गया। शिकायतकर्ता ने मांग की है कि संबंधित दिन की चौकी की सीसीटीवी फुटेज और अन्य रिकॉर्ड की जांच कर पूरे मामले की सच्चाई सामने लाई जाए।
14 अगस्त की रात घर पहुंचने का आरोप
महिला ने अपनी शिकायत में 14 अगस्त की रात करीब साढ़े आठ बजे दोनों सिपाहियों के घर पहुंचने का भी जिक्र किया है। आरोप है कि घर में आने को लेकर सवाल करने पर सिपाहियों की ओर से कथित तौर पर गाली-गलौज और अभद्रता की गई। परिवार के साथ धक्का-मुक्की और घर में तोड़फोड़ किए जाने के आरोप भी शिकायत में लगाए गए हैं। महिला ने एक सिपाही पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने और हाथ उठाने का आरोप लगाया है।
पहले शिकायतें हुईं तो कार्रवाई क्यों नहीं?
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ पहले भी शिकायतें की गई थीं तो उन पर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई? क्या शिकायतों की विधिवत जांच कराई गई या मामला केवल शिकायतों तक ही सीमित रहा?
आरोप यह भी है कि दोनों सिपाही लंबे समय से उसी कोतवाली और चौकी में तैनात हैं। ऐसे में उनकी लगातार तैनाती को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। संवेदनशील चौकियों पर लंबे समय तक एक ही पुलिसकर्मी की तैनाती को लेकर विभागीय स्तर पर समय-समय पर समीक्षा और स्थानांतरण की प्रक्रिया अपनाई जाती है। ऐसे में यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा कि दोनों सिपाहियों की तैनाती की समीक्षा कब हुई और क्या पूर्व शिकायतों को इसमें शामिल किया गया।
सीसीटीवी फुटेज से खुल सकता है राज
शिकायतकर्ता ने चौकी में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग को जांच का अहम आधार बताया है। यदि संबंधित अवधि की फुटेज सुरक्षित है तो युवक को चौकी लाए जाने, उसके साथ वहां क्या हुआ और उसे किन परिस्थितियों में छोड़ा गया, इसकी पड़ताल की जा सकती है। वहीं 14 अगस्त की रात घर पहुंचने के आरोपों की भी सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों के आधार पर जांच संभव है।
जांच के बाद ही सामने आएगी सच्चाई
फिलहाल पूरे मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। मामला पुलिस विभाग से जुड़ा होने के कारण शिकायतकर्ता ने वरिष्ठ अधिकारियों से निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने पर कार्रवाई की मांग की है।
जवाब मांगते सवाल
- पहले शिकायतें हुई थीं तो उन पर क्या कार्रवाई की गई?
- युवक को चौकी ले जाने की वजह और कानूनी प्रक्रिया क्या थी?
- 20 हजार रुपये लेने के आरोप की जांच कैसे होगी?
- 14 अगस्त की रात घर पहुंचने वाले पुलिसकर्मियों की भूमिका क्या थी?
- चौकी और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज सुरक्षित है या नहीं?
- दोनों सिपाहियों की लंबे समय से एक ही चौकी में तैनाती की समीक्षा कब हुई?
- शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई कब होगी?

लेटेस्ट न्यूज़ अपडेट पाने के लिए -
👉 खबरडोज के व्हाट्सप्प ग्रुप से जुड़ें







